नई दिल्ली : वैश्विक अनिश्चितता (Global Uncertainty) के माहौल में भारत सरकार (Government of India) की ओर से लिए गए जरूरी Initiatives से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को मदद मिलने की संभावना है। यह जानकारी मंगलवार को जारी HSBC Global Investment Research की रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, बीते छह महीनों में अमेरिका द्वारा रूस पर crude oil निर्भरता कम करने का दबाव, डॉलर के मुकाबले रुपए का अवमूल्यन और अन्य कारणों से भारतीय OMCs के refining margins पर दबाव बढ़ा है।
HSBC ने कहा, “भारत सरकार OMCs के ऐसे निर्णयों का समर्थन कर रही है, जो कंपनियों के वाणिज्यिक हित में हैं और साथ ही FY24 में हुई LPG under-recovery का भुगतान करने का वादा भी कर रही है।”
इसके परिणामस्वरूप, बीते छह महीनों में OMC shares में 14-23% का उछाल देखा गया, जबकि Nifty में 12% की तेजी रही।
रिपोर्ट में बताया गया कि refining margin में उतार-चढ़ाव आया। भारतीय मुद्रा के अवमूल्यन ने कुछ marketing margin को प्रभावित किया, लेकिन combined margin 22-25 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहा, जो पूरे वर्ष के अनुमान से बेहतर है।
HSBC की वैश्विक टीम ने वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में तेल का बड़ा surplus आने का अनुमान लगाया है, जिससे 2026 में Brent oil का $65 प्रति बैरल का पूर्वानुमान गिर सकता है।
ऑटो ईंधन (ATF) की मांग में कमजोरी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की मांग में तेजी रही। अगस्त 2025 में ऑटो ईंधन की मांग साल-दर-साल 2.6% बढ़ी, पेट्रोल 5.5% और डीजल 1.2% की वृद्धि दर्ज की गई। ATF की मांग लगातार दूसरे महीने नकारात्मक रही।
HSBC ने कहा, “हवाई यातायात (Air Traffic) में हाल के रुझानों में सुधार के साथ, हमें उम्मीद है कि ATF मांग में गिरावट भी जल्द उलट जाएगी।”

