Thursday, August 20, 2026 |
Home Automobileभारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में तेजी

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में तेजी

2025 तक एफटीए को अंतिम रूप देने की उम्मीद, ऑटो सेक्टर रहेगा केंद्र में

by Business Remedies
0 comments

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अब निर्णायक चरण में पहुँच गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत इस वर्ष एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी एफटीए को अंतिम रूप देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

शनिवार को गोयल ने यूरोपीय व्यापार आयुक्त मारोस सेफ्कोविक से मुलाकात की और चल रही वार्ताओं की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत-यूरोपीय संघ एफटीए वार्ता के 13वें दौर में आपकी मेजबानी करना हमारे लिए खुशी की बात थी। हम दोनों पक्षों के लिए व्यापक अवसरों को खोलने वाले एक संतुलित समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

यूरोपीय संघ का दृष्टिकोण

मारोस सेफ्कोविक ने भी इस मुलाकात को सकारात्मक बताते हुए कहा कि वे इस वर्ष तीसरी बार भारत आए हैं ताकि एफटीए को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2025 तक इस समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं। सेफ्कोविक के अनुसार, ऑटोमोबाइल सेक्टर इस समझौते का केंद्र होगा, जिससे टैरिफ उदारीकरण के जरिए दोनों पक्षों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सेफ्कोविक ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच चल रही बातचीत अब तक की सबसे रचनात्मक और गहन है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस बार की वार्ता पहले की तुलना में अधिक गंभीरता और आपसी विश्वास के साथ हो रही है।

भारत के लिए संभावित लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि एफटीए भारतीय उद्योगों और निर्माताओं के लिए यूरोपीय बाजारों में प्रवेश का एक बड़ा अवसर साबित होगा। विशेषकर ऑटो, फार्मा, वस्त्र और टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारतीय कंपनियों को साझेदारी और संयुक्त उद्यमों के नए रास्ते मिल सकते हैं। वाणिज्य मंत्री गोयल का कहना है कि यह समझौता भारतीय निर्माताओं को यूरोपीय कंपनियों और अन्य वैश्विक खिलाड़ियों के साथ सहयोगात्मक नवाचार (Collaborative Innovation) का मौका देगा।

पृष्ठभूमि और महत्व

भारत और ईयू के बीच एफटीए पर बातचीत एक दशक से अधिक समय से चल रही है। हालांकि, कई बार मतभेदों और जटिल मुद्दों के कारण यह प्रक्रिया ठप पड़ चुकी थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और भारत की बढ़ती भूमिका ने दोनों पक्षों को फिर से इस दिशा में सक्रिय किया है।

यूरोपीय संघ भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वर्ष 2023-24 में भारत और ईयू के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 138 अरब डॉलर तक पहुँच गया था। ऐसे में एफटीए दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की क्षमता रखता है।

आगे की राह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने पहले ही इस समझौते को वर्ष के अंत तक आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई थी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्ष टैरिफ, बाज़ार पहुंच और नियामकीय मानकों जैसे जटिल मुद्दों पर कितनी तेजी से सहमति बना पाते हैं।

अगर यह समझौता तय समयसीमा में संपन्न हो जाता है, तो भारत और ईयू के बीच व्यापारिक संबंध नई परिभाषा गढ़ेंगे और यह समझौता 21वीं सदी की सबसे अहम आर्थिक साझेदारियों में से एक बन सकता है।



You may also like

Leave a Comment