वैश्विक स्तर पर शिक्षकों के महत्व और स्थिति पर विचार करने का दिवस आज हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। शिक्षक दिवस भारत में हर साल की भांति 5 सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष,1994 में यूनेस्को की ओर से की गई थी। सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक राजनीतिज्ञ होने के साथ वह एक बेहतरीन शिक्षक, विद्वान और प्रसिद्ध दार्शनिक भी थे। वर्ष,1888 में तमिलनाडू के तिरुत्तनी में उनका जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे बचपन से ही किताबें पढऩे के शौकीन थे और स्वामी विवेकानंद से काफी प्रभावित थे। राधाकृष्णन का निधन चेन्नई में 17 अप्रैल, 1975 को हुआ। जहां विश्व के कुछ देशों में शिक्षकों (गुरुओं) को विशेष सम्मान देने के लिए शिक्षक दिवस का आयोजन किया जाता है। यह दिन शिक्षकों के ज्ञान, नेतृत्व और समाज सेवा के प्रति उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। यह छात्रों को अपने शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करने और उनके मार्गदर्शन को याद रखने का अवसर देता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में शिक्षा में परिवर्तन ला रहे शिक्षकों का जश्न मनाना है। यह शिक्षकों के सामने आने वाली चुनौतियों और उन्हें सफल होने के लिए आवश्यक समर्थन पर विचार करने का भी एक मंच प्रदान करता है। रोचक बात यह है कि शिक्षक दिवस दुनिया के अधिकांश देशों में मनाया जाता है, लेकिन सबने इसके लिए अलग-अलग दिन निर्धारित किए हुए हैं। इसलिए कुछ देशों में शिक्षक दिवस वाले दिन अवकाश रहता है, किंतु बाकी देशों में उस दिन रोजमर्रा की तरह ही कामकाजी दिन रहता है। पीढिय़ों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षकों के महत्व के प्रति जागरुकता लाने के मकसद से इस विशिष्ट दिन की शुरुआत की गई थी। विश्वभर के करीब सौ देशों में यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन स्कूल-कॉलेजों आदि में अपने अध्यापकों तथा गुरुओं के सम्मान में अनेक प्रकार के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

