भारत में लगातार बिगड़ते मौसम को संभालना है तो कुछ कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। हमारे महानगरों में नदियों-तालाबों पर तेजी से कब्जा हो रहा है। वेटलैंड पर बिल्डिंगें खड़ी की जा रहीं, जो नेचुरल वॉटर रिचार्ज सिस्टम का काम करते हैं। इसको रोकना होगा। इस बार जैसा रंग दिखाया है मौसम ने, उसके बाद हमारी नींद खुल जानी चाहिए। क्लाइमेट चेंज के जिस खतरे को लेकर पिछले कई बरसों से पर्यावरण के जानकार और वैज्ञानिक आगाह कर रहे थे, वह अब सिर पर आ पहुंचा है। अगर इस बारे में कुछ न किया गया तो यहां से हालात बदतर ही होंगे। दिल्ली और देश के तमाम दूसरे शहरों ने जून में ही मौसम के दो चरम झेल किए है। पहले जानलेवा गर्मी पड़ी, फिर अधिकांश शहरों में जून का औसत अधिकतम तापमान करीब 42 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके बाद एकसाथ इतनी बारिश हो गई कि सारे इंतजाम पानी में बह गए। अब यह सोचने वाली बात है कि जो शहर कुद दिन पहले पानी की किल्लत से जूझ रहे थे, वे अचानक पानी में कैसे डूबने लगे हैं? गर्मी का रेकॉर्ड तोडऩा अब आम होता जा रहा है। हर साल ऐसा लगता है कि गर्मी पिछले बरस से अधिक पड़ रही है। सर्दियों का मौसम सिकुड़ता जा रहा है, जबकि बारिश अनियमित हो चली है। ये सारे संकेत डराने वाले हैं और साथ ही चेताने वाले भी। क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर हमें दो स्तरों पर काम करने की जरूरत है-पहला उपाय दीर्घकालिक हो और दूसरा फौरी। एक्शन प्लान और गाइडलाइंस पर काम करना होगा। आंध्र प्रदेश का उदाहरण ले सकते हैं, जहां हर साल हीटवेव से निपटने की सरकारी योजना बनती है। इसमें लॉन्ग टर्म के साथ शॉर्ट टर्म उपाय भी रखे जाते हैं। तुरंत राहत के रूप में उन लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए, जिन्हें खुले में काम करना पड़ता है, जैसे श्रमिक, ट्रैफिक पुलिसकर्मी, रेहड़ी-पटरी दुकानदार। स्कूल, ऑफिस वगैरह के समय में बदलाव किया जाए। सार्वजनिक कूल शेल्टर बनाए जा सकते हैं, जहां वे लोग दोपहर में आराम कर सकें, जिनकी मजबूरी है बाहर निकलना। लोगों को अपने घरों की बाहरी दीवारों और छतों पर सफेद पेंट करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे घर के भीतर गर्मी कम लगती है। अगर बिगड़ते मौसम को संभालना है तो कुछ कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। हमारे महानगरों में नदियों-तालाबों पर तेजी से कब्जा हो रहा है। वेटलैंड पर बिल्डिंगें खड़ी की जा रहीं, जो नेचुरल वॉटर रिचार्ज सिस्टम का काम करते हैं। इसको रोकना होगा। हरियाली बढ़ानी होगी।

