Friday, July 17, 2026 |
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विकसित Pharma Patent की संख्या में इजाफा

रिपोर्ट में उजागर: पिछले एक दशक में चार गुना से अधिक आया उछाल

by Business Remedies
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नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क। भारत में विकसित फार्मास्युटिकल पेटेंट फैमिली की संख्या पिछले एक दशक में चार गुना से अधिक बढ़ गई है। साथ ही देश की दवा खोज की पाइपलाइन 195 कंपनियों में 1,095 से अधिक हो गई है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई। रिपोर्ट दिखाती है कि भारत जेनेरिक दवाओं के उत्पादन आधारित मॉडल से Innovation-आधारित Research Model की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश दोगुने से अधिक बढ़ा

Boston Consulting Group (BCG) और HealthKois की संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया कि भारत ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है जहां अगले पांच वर्ष तय करेंगे कि वह अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा, लागत प्रतिस्पर्धा और डेटा की ताकत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी Life Sciences Innovation Ecosystem में बदल पाता है या नहीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में विकसित फार्मा पेटेंट फैमिली की संख्या 2015 में लगभग 716 से बढ़कर 2024 में 2,995 हो गई, जो चार गुना से अधिक की वृद्धि है। वहीं, वित्त वर्ष 2026 में फार्मास्युटिकल क्षेत्र में Private Equity और Venture Capital निवेश दोगुने से अधिक बढ़कर 731 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या में भी हुई बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि में देश में Biotech Startups की संख्या लगभग 1,500 से बढ़कर 2,400 हो गई। वैश्विक फार्मा पेटेंट में भारत की हिस्सेदारी 3-4 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 10 प्रतिशत हो गई है, जो केवल संख्या में ही नहीं बल्कि गुणवत्ता के स्तर पर भी महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है।

भारत ने 10 से अधिक नई दवा परिसंपत्तियां विकसित की

रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले एक दशक में भारत ने 10 से अधिक नई दवा परिसंपत्तियां विकसित की हैं। भारतीय कंपनियां अब केवल जेनेरिक और Biosimilar दवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक बाजारों के लिए Innovative दवाओं के विकास, Licensing और Commercialization की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

उछाल के पीछे चार प्रमुख कारण सामने आए

रिपोर्ट ने इस तेजी के पीछे चार प्रमुख कारण बताए हैं। इनमें शुरुआती और Translational Research के लिए सरकार की ओर से लगभग 5 अरब डॉलर की Funding, शिक्षा संस्थानों और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग, नियामकीय सुधारों के कारण दवा विकास की समयसीमा का 180-270 दिनों से घटकर 60-120 दिन होना तथा Genome Valley और C-CAMP जैसी साझा अनुसंधान एवं विनिर्माण अवसंरचना शामिल हैं। रिपोर्ट में शुरुआती सफलताओं का भी जिक्र किया गया है। इनमें BIRSA 101, भारत की पहली स्वदेशी CRISPR-आधारित Therapy एवं NEXCAR 19, एक स्वदेशी CAR-T Therapy शामिल हैं। NEXCAR 19 की कीमत विदेशों में उपलब्ध समान उपचारों की तुलना में लगभग दसवें हिस्से के बराबर है।

भारत की नवाचार यात्रा ने पकड़ी गति

BCG India एवं दक्षिण-पूर्व एशिया की Managing Director और Senior Partner Priyanka Aggarwal ने कहा कि भारत की नवाचार यात्रा अब वास्तविक गति पकड़ चुकी है और एक स्थायी Innovation Engine के रूप में उसका विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है। HealthKois के सह-संस्थापक और Managing Partner Charles Janssen ने कहा कि हम देख रहे हैं कि भारत में विकसित वैज्ञानिक शोध को वैश्विक फार्मा कंपनियां License दे रही हैं और स्वदेशी CAR-T Therapy वैश्विक लागत की तुलना में बेहद कम कीमत पर मरीजों का इलाज कर रही हैं। ऐसे निवेश की आवश्यकता है जो विज्ञान को समझे और शुरुआती अनिश्चित वर्षों में उसका साथ दे। यही कुछ चुनिंदा सफलताओं और एक मजबूत, टिकाऊ Innovation Engine के बीच अंतर पैदा करेगा।

कई दवा कंपनियां पेटेंट पर बढ़ा रही हैं निवेश

भारत का फार्मा अनुसंधान अब केवल जेनेरिक दवाओं तक सीमित नहीं है। पेटेंट वृद्धि मुख्यत: नई दवा अणु, Biologics और Biosimilar दवाएं, Vaccine Technology, Drug Delivery System, Peptide एवं Protein आधारित दवाएं, Oncology (कैंसर) उपचार, मधुमेह एवं मोटापा उपचार, दवा निर्माण प्रक्रियाएं, Pharmaceutical Formulations और संयोजन हैं। वहीं भारत की प्रमुख दवा कंपनियां जैसे Sun Pharma, Dr. Reddy’s Laboratories, Cipla और Lupin नई दवाओं, विशेषकर मोटापा एवं मधुमेह उपचार के क्षेत्र में अनुसंधान और पेटेंट पर निवेश बढ़ा रही हैं।

इन राज्यों से सबसे अधिक पेटेंट

हाल के वर्षों में भारतीय पेटेंट फाइलिंग में प्रमुख राज्य तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र शामिल हैं। तमिलनाडु ने 2024-25 में अकेले लगभग 15,440 पेटेंट आवेदन दाखिल किए, जो पूरे देश के लगभग 23 फीसदी थे।

फार्मा क्षेत्र में वृद्धि के प्रमुख कारण

अनुसंधान एवं विकास में बढ़ता निवेश, Startup और Biotech कंपनियों की संख्या में वृद्धि, पेटेंट नियमों का Digitization और प्रक्रिया का सरलीकरण, University-Industry Collaboration, Biopharma, Vaccine और विशेष दवाओं पर बढ़ता फोकस, वैश्विक बाजार के लिए Innovation-आधारित उत्पाद विकसित करने की रणनीति शामिल है।



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