वर्तमान में जिस तरह से कई देशों के मध्य अराजकता का बोलबाला चल रहा है, ऐसे में दुनिया भर में शांति, न्याय और मानवाधिकार की दरकार है। कहीं युद्ध हो रहे हैं, तो कहीं अशांति फैली हुई है। कुछ देश अपनी सीमा को बढ़ाने के लिए दूसरे निकटवर्ती देश से संघर्ष करने के लिए प्रयासरत है। इसे दूर करने के लिए हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी न्याय, शांति, मानवाधिकार और कानून के शासन के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता का प्रतीक अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस आज मनाया जाएगा। यह दिन वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों के उल्लंघन, युद्ध अपराधों और नरसंहार जैसे गंभीर मामलों के लिए जवाबदेही तय करने और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के कार्यों का समर्थन करने के लिए समर्पित है। यह दिवस दुनिया भर में न्याय के सिद्धांतों को बढ़ावा देने और शांति व कानून के शासन को सुदृढ़ करने के लिए बहुत जरूरी है। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर अपराधों से पीडि़त लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाना है। यह दिवस वैश्विक न्याय प्रणाली, विशेष रूप से आईसीसी के प्रति जन जागरूकता और समर्थन बढ़ाने का कार्य करता है। इस दिवस की शुरुआत 17 जुलाई, 1998 को इटली के रोम में रोम संधि को अपनाए जाने की याद में हुई। यही वह ऐतिहासिक संधि थी, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की स्थापना का मार्ग खुला। इसके बाद में 1 जून, 2010 को युगांडा के कंपाला में आयोजित रोम संविधि के समीक्षा सम्मेलन के दौरान विभिन्न राष्ट्रों की सभा की गई और 17 जुलाई को आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय दिवस के रूप में घोषित किया गया। यह दिवस याद दिलाता है कि दुनिया में कोई भी व्यक्ति, चाहे वो कितना भी ताकतवर क्यों ना हो, गंभीर अपराधों के लिए कानून से ऊपर नहीं है। आज का दिन आईसीसी और अंतरराष्ट्रीय कानून के जरिए न्याय, शांति और मानवाधिकार की रक्षा का संकल्प ही है।

