बिजऩेस रेेमेडीज/नई दिल्ली
रचनात्मक क्षेत्र में शिक्षा के लिए समर्पित भारत की पहली युनिवर्सिटी वल्र्ड युनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन (डब्लूयूडी) को युनिवर्सिटी ऑफ हडर्सफील्ड (ब्रिटेन) के साथ गठबंधन में 4.4 करोड़ रुपये का अनुदान आर्ट्स एंड ह्युमैनिटीज़ रिसर्च काउंसिल द्वारा प्रदान किया गया है। इस अनुदान का उद्देश्य एक नये ज्ञान और संस्कृति के आदान प्रदान का प्रसार करना है। इस परियोजना का लक्ष्य भारत और ब्रिटेन में डाक घर संस्कृति की जांच परख के लिए एक रचनात्मक स्थल आधारित स्कैनिंग दृष्टिकोण अपनाना और अंग्रेजों के जमाने की अत्याधुनिक वास्तुशिल्पीय प्रौद्योगिकी के पहलुओं का परीक्षण करना है जिससे यह पता लगाया जा सके कि भारत में डाकघर भवनों का भविष्य में कैसे उपयोग किया जा सकता है। यह परियोजना दिसंबर, 2026 तक चलेगी और इसमें लंदन का पोस्टल म्यूजियम और इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज भी शामिल होंगे।
आर्ट्स एंड ह्युमैनिटीज़ रिसर्च काउंसिल (एएचआरसी) कला एवं मानविकी के क्षेत्र में शानदार मूल अनुसंधान के लिए रणनीतिक कोष उपलब्ध कराती है और यह दर्शन और रचनात्मक उद्योगों से लेकर कला संरक्षण और उत्पाद डिजाइन तक के विषयों में विश्वस्तरीय स्वतंत्र अनुसंधान का वित्त पोषण करती है। यह पहल आर्किटेक्चर में प्रोफेसर निक क्लियर और शालीन शर्मा, कल्चरल थ्योरी एंव प्रैक्टिस में रीडर रोवन बैले, आर्किटेक्चर के विद्यार्थियों और दोनों देशों से दक्षिण एशियाई समुदायो के बीच एक गठबंधन है।
वल्र्ड युनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन (डब्लूयूडी)के कुलपति डाक्टर संजय गुप्ता ने कहा कि डब्लूयूडी में हम हमेशा से ही हमारे संस्थान और विश्व के संस्थानों के बीच गहरे संबंध और सांस्कृतिक आदान प्रदान की दिशा में काम करते रहे हैं। यह परियोजना भारत और ब्रिटेन के बीच अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक गठबंधन को बढ़ाएगा और भारत को रचनात्मक और सांस्कृतिक उद्योगों में एक नेता के तौर पर स्थापित करेगा। यह परियोजना ना केवल धरोहरों को संरक्षित करेगी, बल्कि पर्यटन, शहरी नवीकरण और वैश्विक सांस्कृतिक आदान प्रदान को बढ़ाएगी एवं इस सरकार के बहुआयामी विकास के विजन को सहयोग देगी। हम इस प्रतिष्ठित अनुदान के लिए चयनित होने पर गौरवान्वित हैं और इस गठबंधन पर आगे काम करने की आशा करते हुए वैश्विक समुदाय में सार्थक योगदान करने की उम्मीद करते हैं। यह परियोजना ना केवल हमारे विद्यार्थियो का अकादमिक अनुभव समृद्ध करेगी, बल्कि वैश्विक दृष्टिकोण और ज्ञान को साझा करने को प्रोत्साहित करेगी।
3डी टेक्नोलॉजी का अनूठा उपयोग : यह परियोजना 3डी स्कैनिंग में प्रोफेसर निक क्लियर की विशेषज्ञता का उपयोग कर ऐसे दृश्य निरूपण को तैयार करेगी जिससे डाकघर भवनों की सांस्कृतिक विरासत खंगालने में मदद मिल सके और अंग्रेजों के जमाने की वास्तुशिल्पीय धरोहर सामने लाई जा सके। ये जटिलताएं इस सह रचनात्मक व्यवस्था आधारित अनुसंधान के जरिए खंगाली जाएंगी।
भवनों और लोगों की किस्सागोई : इस परियोजना में लंदन का पोस्टल म्यूजियम और इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक) भी शामिल हैं जहां ये अंग्रेजों के जमाने के आकर्षक भवनों का 3डी मॉडल तैयार करने के लिए अनूठे सॉफ्टवेयर का उपयोग करेंगे। साथ ही रचनात्मक समुदायों को शामिल करने से उन लोगों की कहानियों को सामने लाया जा सकेगा जिन्होंने भारत और ब्रिटेन में इन डाकघरों में काम किया है।

