प्रतिवर्ष की भांति आज विश्व डाक दिवस मनाया जाएगा। वर्तमान डिजिटल युग में, जब संचार के साधन अत्यधिक तीव्र हो चुके हैं, डाक विभाग का महत्व और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। यह दिवस केवल कागजी चि_ियों के आदान-प्रदान का स्मरण नहीं कराता, बल्कि वैश्विक सामाजिक और आर्थिक विकास में डाक सेवाओं के अतुलनीय योगदान को दिखाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य जनमानस और व्यवसायों के दैनिक जीवन में डाक विभाग की भूमिका के प्रति जागरूकता फैलाना है। इसके माध्यम से वैश्विक नेटवर्क को सुदृढ़ करने तथा डाक उत्पादों और आधुनिक सेवाओं के बारे में ग्राहकों को शिक्षित किया जाता है। इस दिवस का इतिहास भी गौरवपूर्ण है। आज के दिन वर्ष, 1874 को जनरल पोस्टल यूनियन की स्थापना के लिए बर्न संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जो आगे चलकर यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन बना। वर्ष, 1969 में टोक्यो में आयोजित यूपीयू कांग्रेस ने 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। डाक सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं। भारतीय डाक विभाग आज केवल पत्र भेजने का माध्यम नहीं, बल्कि एक सशक्त वित्तीय केंद्र बन चुका है। सरकार सुकन्या समृद्धि योजना, राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र, पब्लिक प्रोविडेंट फंड और इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक जैसी योजनाओं के जरिए देश के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रही है। सुदूर पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में न्यूनतम दरों पर सार्वभौमिक सेवाएं देकर सरकार यह निश्चित करती है कि देश का हर नागरिक मुख्यधारा से जुड़ा रहे। इस दिवस से हमें यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि तकनीक की दौड़ में भले ही माध्यम बदल गए हों, किंतु मानवीय संवेदनाओं, भरोसे और जुड़ाव का जो पुल डाक व्यवस्था ने सदियों से थाम रखा है, उसकी महत्ता कभी कम नहीं हो सकती। खाकी वर्दी पहने डाकिया आज भी गांव-गांव में विश्वास का दूसरा नाम है। हमें डाक संस्कृति के इस गौरवशाली इतिहास को सहेजते हुए इसके आधुनिकीकरण में अपना सहयोग देना चाहिए, ताकि यह सेवा आने वाली पीढिय़ों के लिए भी उतनी ही उपयोगी बनी रहे।

