Sunday, June 28, 2026 |
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विकसित भारत का आधार है होनहार छात्राएं: विधानसभा अध्यक्ष

राजकीय महिला अभियांत्रिकी महाविद्यालय का वार्षिक उत्सव ऐपिस्टेमिको—2025 आयोजित

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अजमेर में राजकीय महिला अभियांत्रिकी महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव ऐपिस्टेमिको 2025 में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए जीवन में संघर्ष के स्थान के बारे में चर्चा की। होनहार छात्राओं को विकसित भारत का आधार बताया।
विधानसभा अध्यक्ष देवनानी राजकीय महिला अभियांत्रिकी महाविद्यालय माकुपुरा में वार्षिक उत्सव समारोह ऐपिस्टेमिको 2025 को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह महाविद्यालय स्थापना के समय उत्तर भारत का एकमात्र महिला अभियांत्रिकी महाविद्यालय था। इस महाविद्यालय के माध्यम से देश को कई होनहार प्रतिभाएं मिल रही है। ये होनहार छात्राएं ही विकसित भारत का आधार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रयास कर रहे है। यह युवाओं के सहयोग से ही सम्भव होगा। राष्ट्र्र प्रथम के भाव के साथ देश को स्वावलम्बी बनाने के लिए कार्य करें।
उन्होंने कहा कि युवाओं को तनाव रहित जीवन का स्वभाव बनाना चाहिए। तनाव से व्यक्ति की क्षमताओं में कमी होती है। युवाओं को राम, कृष्ण एवं विवेकानन्द जैसे आदर्श सामने रखकर अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। युवाओं को देश को युगानुकूल तथ युग को देशानुकूल बनाने के लिए पूरी शक्ति लगा देनी चाहिए। वर्तमान डिजिटल युग में भी सनातन संस्कृति से जुड़े रहने का प्रयास करें। सनातन परम्पराएं वैज्ञानिक आधार लिए हुए होती है। महाविद्यालय में सनातन संस्कारों के अनुरूप कार्यक्रम होना खुशी की बात है। डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के हित में करें। साथ ही डिजिटल युग की विकृतियों से भी सावधान रहने की आवश्यकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भावनात्मकता का अभाव रहता है। इसके विपरित भारत में सभी सम्बन्ध भावनाओं पर आधारित होते है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सदुपयोग के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि यह बहुत उन्नत तकनीक है। छात्राओं को नवाचार के माध्यम से नई तकनीकों का समाज के लिए सदुपयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक ने अपराध और एकाकीपन को बढ़ावा दिया है। इसके दुष्परिणाम परिवारों के बिखरने के रूप में सामने आने लगे है। इसके लिए वैश्विक युग की तकनीक को अपने लिए उपयोग करने के साथ ही एकाकी नहीं रहने का संकल्प लेना होगा। विद्यार्थी अपने मन की बातों को साथियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों के साथ साझा करनी चाहिए। दबाव के कारण विद्यार्थियों में आत्महत्या की प्रवृत्ति पीड़ादायक है। उन्हें दृढ़ता के साथ नवीन परिस्थितियों का सामना करना चाहिए। परिस्थितियां परिवर्तनशील है। उनसे संघर्ष कर आगे ब?ने का साहस रखें।
उन्होंने कहा कि कला से भरपूर सांस्कृतिक कार्यक्रम पढ़ाई तथा परीक्षा के तनाव को कम करते है। स्वस्थ जीवन तथा व्यक्तित्व में निखार के लिए ऐसे कार्यक्रम आवश्यक है। शिक्षकों को विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचान कर उसे निखारने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थी भी सह शैक्षिक गतिविधियों मेें बढ़-चढ़ कर भाग लेंं। इससे विद्यार्थियों को बदली हुई परिस्थितियों के साथ आत्मसात होने में सुविधा मिलेगी। वे सामाजिक, व्यक्तिगत तथा शैक्षिक चुनौतियों का सामना करने में स्वयं को सक्षम पाएंगे।



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