Sunday, June 28, 2026 |
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US Fed के रुख से गुणवत्तापूर्ण कारोबारों में निवेश का अवसर, विश्लेषकों की राय

by Business Remedies
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US Federal Reserve policy decision creating investment opportunities in quality businesses and Indian stock market

अमेरिका के केंद्रीय बैंक US Federal Reserve द्वारा लगातार चौथी बैठक में ब्याज दरों को बिना बदलाव के बनाए रखने का फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा, लेकिन बैंक की नई आर्थिक अनुमान रिपोर्ट ने यह संकेत दिया है कि ऊंची ब्याज दरों का दौर अपेक्षा से अधिक समय तक जारी रह सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति निवेशकों के लिए मजबूत और गुणवत्तापूर्ण कारोबारों में निवेश के अवसर पैदा कर सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, नीति निर्माताओं के बीच अभी भी मतभेद बना हुआ है। लगभग आधे सदस्य इस वर्ष कम से कम एक और ब्याज दर वृद्धि की संभावना देख रहे हैं। वहीं, महंगाई के अनुमान पहले की तुलना में ऊंचे रखे गए हैं और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर का अनुमान कुछ कमजोर किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि US Federal Reserve की प्राथमिकता अभी भी महंगाई पर नियंत्रण रखना है, भले ही इससे आर्थिक वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी पड़ जाए।

Axis Direct के शोध प्रमुख राजेश पालविया ने कहा कि वैश्विक शेयर बाजारों के लिए यह संदेश अपेक्षाकृत सख्त माना जा सकता है क्योंकि ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदें अब और दूर चली गई हैं। हालांकि भारतीय बाजारों की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत व्यापक आर्थिक संकेतक, कंपनियों की बेहतर आय, व्यवस्थित निवेश योजनाओं (SIP) के माध्यम से लगातार निवेश प्रवाह और सरकार द्वारा बढ़ाया जा रहा पूंजीगत व्यय भारतीय शेयर बाजार को मजबूती प्रदान कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के निवेश प्रवाह और मुद्रा बाजार की चाल का असर भारतीय बाजारों पर देखने को मिल सकता है क्योंकि वैश्विक स्तर पर नकदी की उपलब्धता अभी भी सीमित बनी हुई है। इसके बावजूद US Federal Reserve की नीति से उत्पन्न होने वाली किसी भी अस्थिरता को मध्यम और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।

दो दिवसीय बैठक के समापन पर, नए अध्यक्ष केविन वार्श के नेतृत्व में US Federal Reserve ने अपनी लक्ष्य ब्याज दर को 3.50-3.75प्रतिशत पर स्थिर रखा। हालांकि बैंक ने यह भी संकेत दिया कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए इस वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में एक चौथाई प्रतिशत तक की अतिरिक्त वृद्धि की आवश्यकता पड़ सकती है। इस घोषणा के बाद बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि सरकारी बॉन्ड प्रतिफल में तेज बढ़ोतरी देखी गई। निवेशकों को चिंता है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए सख्त मौद्रिक नीति लंबे समय तक जारी रह सकती है। तकनीकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में भी बिकवाली देखने को मिली। माइक्रोसॉफ्ट, मेटा प्लेटफॉर्म्स, अल्फाबेट और अमेज़न के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे अमेरिकी बाजारों पर अतिरिक्त दबाव बना।

HDFC Securities के उपाध्यक्ष नंदीश शाह के अनुसार, ब्याज दर वृद्धि की आशंकाओं के कारण आई तेज गिरावट के बाद अमेरिकी शेयर वायदा बाजार में सुधार देखा जा रहा है। इसकी प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीद है। यदि यह समझौता होता है तो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य में गतिविधियां सामान्य हो सकती हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बाजार भावना को समर्थन मिल सकता है। कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी रहने के बावजूद भारतीय बाजार की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत हैं। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत वित्तीय आधार वाले गुणवत्तापूर्ण कारोबारों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।



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