नई दिल्ली,
पिछले सप्ताह अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। उस दौरान कीमतें लगभग 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई थीं। हालांकि शुक्रवार सुबह बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जब अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट देने की घोषणा की।
इस घोषणा के बाद वैश्विक तेल बाजार में कुछ राहत देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट कच्चा तेल अप्रैल अनुबंध में लगभग 1.52 प्रतिशत गिरकर 84.21 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल शुरुआती कारोबार में लगभग 2.10 प्रतिशत गिरकर 79.31 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिन की छूट से वैश्विक तेल आपूर्ति शृंखला पर बना दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है। हाल के दिनों में होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और संभावित व्यवधान की आशंकाओं के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई थी। इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित होता है। अमेरिका के वित्त विभाग के सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति जारी रखने के लिए भारतीय रिफाइनरियों को अस्थायी 30 दिन की छूट दी जा रही है, जिससे वे समुद्र में पहले से फंसे रूसी तेल की खरीद कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल अल्पकालिक व्यवस्था है और इससे रूस की सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा, क्योंकि यह केवल पहले से समुद्र में मौजूद तेल से जुड़े लेनदेन तक ही सीमित है।
इससे पहले अमेरिका ने यह भी संकेत दिया था कि यदि जरूरत पड़ी तो होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकती है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। व्हाइट हाउस का कहना है कि ईरान के खिलाफ हालिया कदम लंबे समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता को बेहतर बना सकते हैं। भारत की ऊर्जा जरूरतों में आयातित तेल की हिस्सेदारी बहुत बड़ी है। देश अपनी कुल तेल आवश्यकता का लगभग 90 प्रतिशत आयात के माध्यम से पूरा करता है। इसलिए वैश्विक बाजार में कीमतों और आपूर्ति की स्थिति का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
वैश्विक जहाज निगरानी कंपनी क्लेपलर के आंकड़ों के अनुसार फरवरी महीने में रूस भारत को औसतन लगभग 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आपूर्ति कर रहा था। इसके बाद सऊदी अरब लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन और इराक लगभग 9.8 लाख बैरल प्रतिदिन आपूर्ति कर रहे थे। भारत में प्रतिदिन करीब 55 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती है। इसमें से लगभग 15 से 20 लाख बैरल प्रतिदिन होरमुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत तक पहुंचता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव या सैन्य गतिविधि वैश्विक तेल बाजार के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

