New Delhi,
देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। वर्ष 2020 से अब तक उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर लगभग 7.83 करोड़ MSME इकाइयों ने पंजीकरण कराया है। इन इकाइयों के माध्यम से कुल 34.50 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। यह जानकारी केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतिन राम मांझी ने गुरुवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। मंत्री ने बताया कि इसी अवधि में लगभग 1.37 लाख MSME इकाइयां बंद भी हुई हैं। हालांकि यह संख्या कुल पंजीकृत इकाइयों का केवल 0.17 प्रतिशत ही है, जिससे स्पष्ट होता है कि अधिकांश इकाइयां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। सरकार के अनुसार, उद्यम पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक 28 फरवरी 2026 तक पंजीकृत 7.83 करोड़ MSME इकाइयों ने मिलकर लगभग 34.50 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान किया है। इससे यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। मंत्री ने यह भी बताया कि किसी उद्यम के पंजीकरण समाप्त होने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें मालिकाना परिवर्तन, प्रमाणपत्र की आवश्यकता समाप्त होना, दोहरा पंजीकरण, व्यवसाय बंद होना या अन्य प्रशासनिक कारण शामिल हैं।
MSME विकास के लिए कई योजनाएं लागू
सरकार ने MSME क्षेत्र के विकास और प्रोत्साहन के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम लागू किए हैं। इनमें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम, MSME प्रदर्शन उन्नयन कार्यक्रम, एसआरआई कोष, पीएम विश्वकर्मा योजना और MSME चैंपियंस योजना शामिल हैं। मंत्री ने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों को सहयोग प्रदान करती है, ताकि छोटे उद्योगों को वित्त, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता मिल सके।
कोविड काल में मिली विशेष ऋण सुविधा
कोविड महामारी के दौरान छोटे व्यवसायों को आर्थिक सहायता देने के लिए सरकार ने 5 लाख करोड़ रुपये की आपातकालीन ऋण गारंटी योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत MSME सहित विभिन्न व्यवसायों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई। यह योजना 31 मार्च 2023 तक संचालित रही, जिसके दौरान लगभग 1.13 करोड़ ऋण गारंटी MSME इकाइयों को प्रदान की गईं। अनुसंधान रिपोर्ट में भी योजना का प्रभाव भारतीय स्टेट बैंक की 23 जनवरी 2023 की एक अनुसंधान रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के कारण लगभग 14.6 लाख MSME खातों को आर्थिक संकट से बचाया जा सका। इनमें से लगभग 98.3 प्रतिशत खाते सूक्ष्म और लघु उद्यम श्रेणी से संबंधित थे। सरकार ने यह भी प्रावधान किया है कि यदि किसी MSME की श्रेणी में वृद्धि होती है, तो उसे तीन वर्षों तक गैर-कर लाभ मिलते रहेंगे, ताकि उद्योग को विस्तार के दौरान अतिरिक्त बोझ न उठाना पड़े।
एसआरआई कोष से मिलेगा विकास पूंजी
MSME क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए 50,000 करोड़ रुपये का एसआरआई कोष भी स्थापित किया गया है। इसमें 10,000 करोड़ रुपये भारत सरकार द्वारा और 40,000 करोड़ रुपये निजी इक्विटी तथा वेंचर कैपिटल कोषों के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस कोष का उद्देश्य योग्य MSME इकाइयों को विकास के लिए पूंजी उपलब्ध कराना है। सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम भी चला रही है। यह ऋण आधारित अनुदान योजना है, जिसके माध्यम से गैर-कृषि क्षेत्र में छोटे उद्यम स्थापित कर ग्रामीण और शहरी बेरोजगार युवाओं तथा पारंपरिक कारीगरों को स्वरोजगार के अवसर दिए जाते हैं। मंत्री ने बताया कि इस योजना के लाभार्थियों में लगभग 39 प्रतिशत महिलाएं हैं। महिलाओं को इस योजना के तहत 35 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है, जबकि सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों के लिए यह सीमा 25 प्रतिशत तक है।

