Thursday, March 12, 2026 |
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Tax मामलों में पारदर्शिता भारत की आर्थिक Governance की पहचान: वित्त मंत्री सीतारमण

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि भारत में टैक्स मामलों में पारदर्शिता हमेशा एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म से कहीं आगे रही है। यह इकोनॉमिक गवर्नेंस के फेयरनेस और जिम्मेदारी पर आधारित होने के सिद्धांत को दर्शाता है।
18वीं ग्लोबल फोरम प्लेनरी मीटिंग में वित्त मंत्री ने कहा कि जब व्यक्ति या कंपनियां अपना फेयर शेयर पे करते हैं और जब चोरी को प्रभावी ढंग से रोका जाता है, तो समाज अधिक मजबूत और बराबर बनता है। इसी भरोसे ने हमारे कानूनी और एन्फोर्समेंट फ्रेमवर्क को आकार देने का काम किया है। वित्त मंत्री ने कहा, “गैर-कानूनी पैसे के लेन-देन और अनडिस्क्लोज्ड विदेशी संपत्ति के खिलाफ हमारे कानून इसी सोच को दिखाते हैं और साथ ही रिक्वेस्ट पर जानकारी आदान-प्रदान करना और ऑटोमैटिक जानकारी आदान-प्रदान के स्टैंडर्ड में हमारी भागीदारी भी यही दिखाती है।”
उनके अनुसार, पारदर्शिता का सीधा प्रभाव डेवलपमेंट पर भी पड़ता है। पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन, हेल्थ सर्विस और वेलफेयर प्रोग्राम घरेलू संसाधनों पर निर्भर करते हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, “पारदर्शिता के साथ जुटाया गया हर रुपया और डॉलर जिंदगियों को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।” उन्होंने कहा कि जब देश की संपत्ति वैध टैक्स से बचती है तो इससे न केवल राजस्व में कमी आती है बल्कि डेवलपमेंट में भी कमी आती है। विकासशील देशों के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रभाव है। उन्होंने बताया कि टैक्स पे करने को लेकर सुधार क्लैरिटी, सिंपलिफिकेशन और टैक्स पेयर्स के साथ विश्वसनियता बनाने की कोशिशों से आया है। टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में हमने साझा की जानकारियों को कम्प्लायंस और रिस्क के एनालिसिस के साथ जोडऩे की कोशिश की है। उन्होंने कहा, “टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमता हमें जानकारी को समय पर और अच्छे तरीकों से समझने का मौका दे रही है। इनोवेशन को हमेशा जिम्मेदारी के साथ चलना चाहिए। यह वह बैलेंस है, जो सिस्टम को मजबूती और विश्वसनीयता प्रदान करता है।
वित्त मंत्री के अनुसार, “आगे देखते हुए कई नई चुनौतियां हैं, जिनके लिए साथ मिलकर काम करने की जरूरत होगी। अर्थव्यवस्था का डिजिटलाइजेशन, नए फाइनेंशियल प्रोडक्टस का उभरना और बेनेफिशियल ऑनरशिप के बढ़ते स्ट्रक्चर के लिए अलग-अलग अधिकार क्षेत्रों के बीच लगातार सहयोग की जरूरत है।”



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