बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार मिशन-क्रिटिकल संचार प्रणाली विकसित करने के लिए नीतियां और ढांचा तैयार कर रही है, जिससे अचानक आने वाली जलवायु आपदाओं का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। उन्होंने कहा, “बढ़ती जलवायु असुरक्षाओं और प्राकृतिक आपदाओं के दौर में यह विषय भारत और वैश्विक समुदाय दोनों के लिए बेहद रणनीतिक महत्व रखता है। शहरी वातावरण प्रबंधन और जटिल सुरक्षा चुनौतियों में संचार सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है।”
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के बोर्ड सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा कि अनिश्चितता की तैयारी में मजबूत, इंटरऑपरेबल मिशन-क्रिटिकल नेटवर्क बनाना जरूरी है, ताकि जीवन को तेजी और भरोसे के साथ सुरक्षित किया जा सके। इस सम्मेलन का आयोजन ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) और द क्रिटिकल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (टीसीसीए) ने किया था, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। टीसीसीए के सीईओ केविन ग्राहम ने भारत को वैश्विक मानकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बीआईएफ की चेयरपर्सन अरुणा सुंदरराजन ने नीति निर्माताओं, नियामकों और उद्योग जगत के बीच बेहतर तालमेल पर बल दिया। इस महीने की शुरुआत में ट्राई ने डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए प्रॉपर्टीज की रेटिंग मैनुअल जारी किया था। यह देश का पहला मानकीकृत ढांचा है, जिसके जरिए यह आंका जा सकेगा कि इमारतें हाई-स्पीड और भरोसेमंद डिजिटल एक्सेस के लिए कितनी सक्षम हैं। लाहोटी ने कहा, “21वीं सदी में डिजिटल कनेक्टिविटी विलासिता नहीं, बल्कि बिजली और पानी की तरह आवश्यक बुनियादी ढांचा है। यह विकास, नवाचार और अवसरों को शक्तिदेता है। यह ढांचा हर इमारत को डिजिटल इंडिया विजन के लिए तैयार करने और समावेशी राष्ट्रीय विकास की नींव रखने की दिशा में बड़ा कदम है।”

