नई दिल्ली: वेस्ट एशिया में जारी संकट और उससे पैदा हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का असर भारतीय विमानन क्षेत्र पर लगातार देखने को मिल रहा है। नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय यात्रा मांग, उड़ान संचालन क्षमता और विमानन कंपनियों की लाभप्रदता पर दबाव बना हुआ है, जिससे क्षेत्र की व्यापक रिकवरी में देरी हो रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, April 2026 में भारतीय विमानन कंपनियों का अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात लगभग 1.8 मिलियन यात्रियों पर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 39 प्रतिशत कम रहा। वहीं, मासिक आधार पर भी इसमें 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यात्रियों द्वारा तय की गई कुल दूरी को दर्शाने वाला राजस्व यात्री किलोमीटर लगभग 33 प्रतिशत घटकर 7.2 अरब पर पहुंच गया। इसी दौरान उड़ानों की संख्या में भी सालाना आधार पर लगभग 37 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, हालांकि मासिक स्तर पर मामूली सुधार देखने को मिला।
रिपोर्ट में बताया गया है कि विमानन कंपनियां लगातार क्षमता प्रबंधन और मार्गों के पुनर्गठन की रणनीति अपना रही हैं। उपलब्ध सीट किलोमीटर में लगभग 28 प्रतिशत की सालाना गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद मांग में आई कमजोरी क्षमता कटौती से अधिक रही, जिसके चलते यात्री भार कारक घटकर लगभग 75.5 प्रतिशत पर पहुंच गया। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 617आधार अंक और पिछले महीने की तुलना में 735 आधार अंक कम रहा। विश्लेषकों के अनुसार, वेस्ट एशिया संघर्ष का नकारात्मक प्रभाव April महीने के दौरान भी जारी रहा, जिससे न केवल यात्रियों की संख्या प्रभावित हुई बल्कि विमानन नेटवर्क की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ा।
ईंधन लागत भी विमानन क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल रही, जो सालाना आधार पर 44 प्रतिशत अधिक है। वहीं, सिंगापुर जेट ईंधन की कीमत लगभग 128 डॉलर प्रति बैरल रही, जिसमें 65 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा भारतीय मुद्रा में कमजोरी ने भी विमानन कंपनियों की लागत बढ़ाई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 95पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11प्रतिशत अधिक है। इससे विमान पट्टे, रखरखाव और अन्य डॉलर आधारित खर्चों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
घरेलू स्तर पर विमानन टरबाइन ईंधन की कीमत लगभग ₹.1.05 लाख प्रति किलोलीटर रही, जो सालाना आधार पर 18 प्रतिशत और मासिक आधार पर 9प्रतिशत अधिक है। हालांकि सरकार द्वारा किए जा रहे हस्तक्षेप के कारण वैश्विक ईंधन महंगाई का पूरा बोझ यात्रियों पर नहीं डाला जा सका है। घरेलू विमानन बाजार की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। April 2026 में घरेलू यात्री यातायात घटकर लगभग 13.9 मिलियन यात्रियों पर आ गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3प्रतिशत और पिछले महीने की तुलना में 4 प्रतिशत कम है।
दूसरी ओर, घरेलू मार्गों पर क्षमता विस्तार जारी रहा और उपलब्ध सीट क्षमता में लगभग 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन यात्री मांग अपेक्षित गति से नहीं बढ़ने के कारण सीटों का उपयोग स्तर कमजोर रहा। रिपोर्ट के अनुसार, वेस्ट एशिया संकट फिलहाल भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। विमानन कंपनियां क्षमता समायोजन और मार्ग पुनर्गठन जैसे कदम उठा रही हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा पैटर्न में बदलाव और कमजोर मांग के कारण विदेशी परिचालन दबाव में हैं। इससे पूरे क्षेत्र की रिकवरी प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक समय ले सकती है।

