Wednesday, May 20, 2026 |
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Tata Motors ने V.O. Chidambaranar Port Authority के साथ समझौता किया; 40 ग्रीन हाइड्रोजन हैवी-ड्यूटी ट्रकों की तैनाती

by Business Remedies
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तूतीकोरिन: देश को नेट-ज़ीरो उत्सर्जन की दिशा में आगे बढ़ाने की मुहिम को मजबूती देते हुए Tata Motors ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित V.O. Chidambaranar Port Authority (VOC पोर्ट) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत बंदरगाह परिसर में 40 ग्रीन हाइड्रोजन इंटरनल कम्बशन इंजन (H2 ICE) से संचालित हैवी-ड्यूटी प्राइम मूवर्स चरणबद्ध तरीके से तैनात किए जाएंगे। यह समझौता माननीय केंद्रीय पोर्ट्स, शिपिंग और वॉटरवेज़ मंत्री Sarbananda Sonowal की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

समझौते के अनुसार, टाटा मोटर्स सबसे पहले एक हाइड्रोजन-पावर्ड प्राइम मूवर का ट्रायल शुरू करेगी। ट्रायल के सफल परिणामों के बाद अगले दो वर्षों में कुल 40 H2 ICE प्राइम मूवर्स को चरणबद्ध तरीके से पोर्ट ऑपरेशन्स में शामिल किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा, जो भारत सरकार की ग्रीन एनर्जी और भविष्य-तैयार समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

VOC पोर्ट के चेयरपर्सन श्री सुसांता कुमार पुरोहित, IRSEE, ने इस साझेदारी को पोर्ट के नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम बताया। उनके अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन ट्रकों की तैनाती से कार्गो हैंडलिंग ऑपरेशन्स में कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी और भारत में सस्टेनेबल पोर्ट-लेड लॉजिस्टिक्स के लिए एक नया मानदंड स्थापित होगा। इस पहल को समर्थन देने के लिए पोर्ट 2 मेगावाट का इलेक्ट्रोलाइज़र और एक समर्पित हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रहा है, जिससे एक सशक्त ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम तैयार किया जा सके।

टाटा मोटर्स के वाइस प्रेसिडेंट और बिज़नेस हेड – ट्रक्स, श्री राजेश कौल ने कहा कि यह सहयोग हाइड्रोजन-आधारित हेवी-ड्यूटी ट्रकिंग को वास्तविक पोर्ट परिचालन में लागू करने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने पिछले कई महीनों में पोर्ट अथॉरिटीज़ के साथ मिलकर कार्गो हैंडलिंग एप्लीकेशन्स में हाइड्रोजन ट्रकों की व्यवहार्यता का आकलन किया है। यह पायलट परियोजना कुल स्वामित्व लागत (TCO) की प्रतिस्पर्धात्मकता का परीक्षण करने और ग्रीन हाइड्रोजन आधारित लॉजिस्टिक्स समाधानों की क्षमता प्रदर्शित करने में सहायक होगी।

इस प्रोजेक्ट के तहत तैनात किए जाने वाले बेड़े में टाटा मोटर्स का प्राइमा 55-टन प्राइम मूवर शामिल है, जिसे उच्च टिकाऊपन, लागत-प्रभावशीलता और बेहतरीन प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। प्रीमियम ‘प्राइमा केबिन’ और उन्नत ड्राइवर-असिस्ट सुरक्षा फीचर्स से लैस ये ट्रक न केवल ड्राइवर की सुविधा और सुरक्षा को बढ़ाते हैं, बल्कि लंबी अवधि में उत्पादकता में भी सुधार करते हैं।

टाटा मोटर्स वैकल्पिक ईंधन प्रौद्योगिकियों के विकास में अग्रणी रही है। कंपनी बैटरी इलेक्ट्रिक, सीएनजी, एलएनजी, हाइड्रोजन इंटरनल कम्बशन इंजन और हाइड्रोजन फ्यूल सेल जैसी तकनीकों पर आधारित मोबिलिटी समाधान विकसित कर रही है। छोटे कमर्शियल वाहनों से लेकर हैवी ट्रकों और बसों तक, कंपनी के पास वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों का व्यापक पोर्टफोलियो है। वर्ष 2025 में टाटा मोटर्स ने देश के प्रमुख माल ढुलाई मार्गों पर हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रकों के ट्रायल भी शुरू किए थे, साथ ही 15 हाइड्रोजन फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक बसों (FCEV) का टेंडर जीतकर उन्हें सफलतापूर्वक भारतीय सड़कों पर संचालित किया है।

यह साझेदारी न केवल बंदरगाह-आधारित लॉजिस्टिक्स के डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि भारत में ग्रीन हाइड्रोजन को व्यावसायिक स्तर पर अपनाने की प्रक्रिया को भी तेज़ी देने का संकेत देती है।



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