बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। परंपरागत रूप से भारत में स्टोन प्रोसेसिंग इंडस्ट्री मंदिरों, महलों और भव्य इमारत के निर्माण के रूप में सबसे पुराने उद्योगों में से एक है। यहां मार्बल, ग्रेनाइट, स्लेट स्टोन और अन्य कई प्रकार के स्टोन रचनात्मक भावनाओं के प्रकटीकरण के काम आते हैं। सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, जेईसीसी ग्राउंड पर स्टोन इंडस्ट्री की प्रमुख प्रदर्शनी स्टोनमार्ट-2026 आयोजित हो रही है। यहां बिजनेस रेमेडीज ने स्टोन इंडस्ट्री में लंबे समय से कार्यरत अनुभवी उद्यमी हितेश पटेल से स्टोन प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की प्रमुख आवश्यकताओं पर जानकारी हासिल की है।
उन्होंने बताया कि स्टोन प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को स्किल्ड लोगों को तैयार करने के लिए ध्यान फोकस करना होगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कंप्यूटराइज्ड और सीएनसी आधारित मशीनों के माध्यम से स्टोन प्रोसेसिंग संबंधित कार्य हो रहा है। ऐसे में पेंटर, ऑपरेटर, प्रोगामर, सुपरवाइजर एवं डिजाइनर का संबंधित विधाओं में दक्ष होना आवश्यक है। इसके लिए इंडस्ट्री को ट्रेनिंग पर ध्यान देना होगा। इससे न सिर्फ इंडस्ट्री को दक्ष और सक्षम कामगार मिल सकेंगे बल्कि वे उद्यमी के रूप में भी नई उद्योग स्थापित करेंगे। केंद्र सरकार ने भी ‘स्किल इंडिया’ के माध्यम इस संबंध में प्रयास तेज किए हैं। केंद्र सरकार का मानना है कि 2047 तक विकसित भारत की अवधारणा को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में स्किलफुल लोगों की जरूरत पड़ेगी। स्टोन इंडस्ट्री को मशीनरी इंडस्ट्री के साथ मिलकर ट्रेनिंग के व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा। लोगों को रोजगार और अच्छा पैकेज मिलने पर ही उनमें स्टोन इंडस्ट्री में काम करने की भावना जागृत होगी।

