बिजनेस रेमेडीज / मुंबई (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते US–Iran tensions के असर से हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस तेज गिरावट से निवेशकों को करीब ₹13.65 लाख करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। बाजार बंद होने तक BSE Sensex 2.46% या 1,836.57 अंक गिरकर 72,696.39 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 2.60% यानी 601.85 अंक टूटकर 22,512.65 पर आ गया। इससे पहले 19 मार्च को भी बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई थी।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने और महंगाई बढ़ने की आशंका ने वैश्विक बाजारों को झकझोर दिया है। इसके चलते भारतीय बाजार में भी भारी बिकवाली देखने को मिली और सूचकांक करीब 2.5% तक लुढ़क गए। इस गिरावट का असर कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पर भी साफ दिखा। Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग ₹14 लाख करोड़ घटकर ₹428.76 लाख करोड़ से गिरकर ₹415.11 लाख करोड़ रह गया।
इंट्रा-डे कारोबार में भी उतार-चढ़ाव तेज रहा। सेंसेक्स 73,732.58 पर खुलने के बाद एक समय 1,974.5 अंक गिरकर 72,558.44 तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 भी 22,824.35 से फिसलकर 22,471.25 के निचले स्तर तक गया, जो 2.75% की गिरावट को दर्शाता है। बाजार की अस्थिरता को दर्शाने वाला India VIX भी तेजी से उछला और सत्र के दौरान 19% से अधिक बढ़कर 27.17 तक पहुंच गया, जबकि अंत में 26.73 पर बंद हुआ। व्यापक बाजारों में गिरावट और भी ज्यादा रही। निफ्टी मिडकैप में 3.90% और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 3.94% की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरवार प्रदर्शन में निफ्टी कंस्ट्रक्शन ड्यूरेबल सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जिसमें 5% से अधिक की गिरावट आई। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी (4.74%) और निफ्टी मेटल (4.97%) सेक्टर भी भारी दबाव में रहे।
इस बीच, रुपये पर भी दबाव देखने को मिला। डॉलर के मुकाबले रुपया 0.3% गिरकर 93.9750 के ऑल-टाइम लो स्तर पर पहुंच गया। पिछले सत्र में यह 93.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। विदेशी निवेशकों की निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने रुपये को कमजोर किया है। मार्केट विशेषज्ञ Sunil Shah के अनुसार, “नए सप्ताह की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद खराब रही, जहां सेंसेक्स में 1,800 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।” विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

