Sunday, June 28, 2026 |
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भारत में Sovereign AI रणनीति को तेज़ी, 96 प्रतिशत नीति-निर्माता कर रहे आगे बढ़ाने का काम: Report

by Business Remedies
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India Advancing Sovereign AI Strategy With Strong Policymaker Support According To Dell Technologies Report

नई दिल्ली। भारत एक विशिष्ट Sovereign AI बाज़ार के रूप में उभर रहा है, जहां विनियमन, नवाचार और राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। एक नई Report के अनुसार, देश के 96 प्रतिशत नीति-निर्माता Sovereign AI रणनीति को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।

डेल टेक्नोलॉजीज़ की Report में बताया गया है कि 97.7 प्रतिशत सरकारी अधिकारियों ने Agentic AI पर भरोसा जताया है और इसे अपनाने की प्रक्रिया को तेज़ करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम माना है। इनमें से 44.4 प्रतिशत अधिकारियों का मानना है कि Agentic AI भविष्य में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह आंकड़ा Asia Pacific क्षेत्र के 36.9 प्रतिशत औसत से काफी अधिक है। Report के अनुसार, 53.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने मजबूत प्रशासनिक और नियामकीय सुरक्षा उपायों के साथ AI को अपनाने का समर्थन किया है। इससे स्पष्ट है कि भारत में AI तकनीक के विस्तार के साथ-साथ जवाबदेही और सुरक्षा को भी समान महत्व दिया जा रहा है।

भारत के सरकारी नेतृत्व ने Agentic AI को लेकर Asia Pacific क्षेत्र की तुलना में अधिक विश्वास व्यक्त किया है। कई संस्थाएं अब केवल अवधारणा परीक्षण के चरण से आगे बढ़कर वास्तविक निवेश की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। हालांकि, भारत को Sovereign AI बाज़ार के अपने बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए दो प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना होगा। इनमें विशेष AI विशेषज्ञों की कमी और साइबर सुरक्षा क्षमता को मजबूत बनाना शामिल है।

Report में कहा गया है कि 92 प्रतिशत से अधिक सरकारी अधिकारियों ने विशेष डिजिटल प्रतिभा की आवश्यकता को प्राथमिकता वाला क्षेत्र बताया है। नेटवर्क प्रबंधन और एकीकरण, AIOps तथा Sovereign Data Governance जैसी क्षमताओं की मांग सबसे अधिक देखी जा रही है। इसके अलावा, 36 प्रतिशत अधिकारियों ने साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि 34 प्रतिशत अधिकारियों ने विभिन्न देशों के नियामकीय ढांचों के अनुरूप काम करने को एक महत्वपूर्ण चुनौती बताया।

डेल टेक्नोलॉजीज़ इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनीष गुप्ता ने कहा कि भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में एक अनूठा और अग्रणी मॉडल विकसित किया है। यह केवल प्रशासनिक ढांचा ही नहीं बल्कि नवाचार को बढ़ावा देने वाला एक प्रभावी मंच भी है। भारत ने AI संप्रभुता के क्षेत्र में आधार, UPI, ONDC और भाषिणी जैसे राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक मंचों के माध्यम से एक अलग पहचान बनाई है। इन प्रणालियों के जरिए शासन, डेटा प्रबंधन और भरोसे को राष्ट्रीय संचालन व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।

लगभग 73.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि संवेदनशील राष्ट्रीय डेटा की सुरक्षा और स्थानीय नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए Sovereign AI बेहद आवश्यक है। नागरिकों के बड़े पैमाने पर डेटा का प्रबंधन करने वाली सरकारों के लिए यह एक बुनियादी आवश्यकता बन चुका है। डेटा सुरक्षा के अलावा, 70 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि Sovereign AI में निवेश भू-राजनीतिक जोखिमों और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली संभावित बाधाओं से बचाव का एक रणनीतिक माध्यम भी है। इससे भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता और डिजिटल संप्रभुता हासिल करने में मदद मिल सकती है।



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