भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत तेज़ हो गई है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि दोनों देश एक मजबूत व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे नए आर्थिक अवसर पैदा होंगे और दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी। सर्जियो गोर ने अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर के भारत दौरे का स्वागत करते हुए कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के महत्वाकांक्षी व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौता भारत और अमेरिका दोनों के लिए नए व्यापारिक अवसरों के द्वार खोलेगा तथा आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
जैमिसन ग्रीर का यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। इस दौरान ग्रीर और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच कई दौर की महत्वपूर्ण बैठकें होने वाली हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य समझौते के पहले चरण के ढांचे को अंतिम रूप देना है। इससे पहले इसी महीने दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों के स्तर पर भी विस्तृत चर्चा हो चुकी है। दोनों पक्ष एक अंतरिम व्यापार व्यवस्था पर सहमति बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो आगे चलकर व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का आधार बनेगी।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल पहले भी विश्वास व्यक्त कर चुके हैं कि भारत और अमेरिका कई लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में सकारात्मक प्रगति कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया था कि समझौते के पहले चरण को अगले महीने के मध्य तक पूरा किया जा सकता है। इन वार्ताओं का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि अमेरिका द्वारा अपने व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया अस्थायी 10 प्रतिशत शुल्क 24 जुलाई को समाप्त होने वाला है। यह शुल्क इस वर्ष की शुरुआत में लागू किया गया था और यह पहले से लागू सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र शुल्क दरों के अतिरिक्त लगाया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यापार समझौता तय समय पर संपन्न हो जाता है तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। साथ ही भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते हैं, जबकि अमेरिकी कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक अधिक सुगम पहुंच मिल सकेगी। यह समझौता वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को और अधिक मजबूती प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

