New Delhi,
भारत के startup ecosystem में ShopClues का सफर value destruction का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। एक समय पर देश के सबसे promising unicorn में गिनी जाने वाली इस कंपनी का valuation जहां 2016 में करीब 1.1 billion dollar तक पहुंच गया था, वहीं कुछ ही वर्षों में यह गिरकर बेहद कम कीमत पर बिक गई।
Gurugram स्थित इस e-commerce कंपनी को 2019 में Singapore की कंपनी Qoo10 ने लगभग 70 से 100 million dollar के all-stock deal में अधिग्रहित किया। इस सौदे में कंपनी के valuation का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खत्म हो गया, जो startup दुनिया के लिए एक बड़ा झटका माना गया। ShopClues ने खुद को “online चांदनी चौक” के रूप में स्थापित किया था। कंपनी का focus Tier-2 और Tier-3 शहरों के price-sensitive ग्राहकों पर था, जहां यह बिना ब्रांड वाले और कम कीमत के सामान उपलब्ध कराती थी। इस रणनीति के चलते कंपनी ने तेजी से growth हासिल की, खासकर उस समय जब बड़े प्रतिस्पर्धी Amazon और Flipkart मुख्य रूप से metro शहरों पर ध्यान दे रहे थे।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा से बिगड़ी स्थिति
हालांकि यह बढ़त ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई। Amazon और Flipkart ने छोटे शहरों में तेजी से विस्तार किया और बेहतर logistics, भारी discount और मजबूत customer trust के साथ बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। इससे ShopClues का मुख्य अंतर धीरे-धीरे खत्म हो गया। कंपनी का marketplace मॉडल, जो असंगठित विक्रेताओं पर निर्भर था, quality control की समस्याओं में फंस गया। प्लेटफॉर्म पर नकली और खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों की शिकायतें बढ़ने लगीं। इससे return rate 30 से 40 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिससे ग्राहकों का भरोसा कमजोर हुआ। कंपनी की समस्याएं केवल बाजार तक सीमित नहीं रहीं। सह-संस्थापक संदीप अग्रवाल को अमेरिका में insider trading के आरोपों के बाद पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद राधिका अग्रवाल और संजय सेठी ने कंपनी की जिम्मेदारी संभाली। बाद में संस्थापकों के बीच सार्वजनिक विवाद ने निवेशकों का विश्वास और कमजोर कर दिया।
वित्तीय संकट और गिरता कारोबार
IPO की तैयारी के दौरान कंपनी ने लाभप्रदता दिखाने के लिए marketing खर्च में कटौती की, जिससे gross merchandise value में भारी गिरावट आई। नए निवेश जुटाने के कई प्रयास असफल रहे और मौजूदा निवेशकों ने भी अतिरिक्त पूंजी लगाने से दूरी बना ली। कंपनी ने अपने business model में बदलाव की कोशिश की, जैसे enterprise segment पर ध्यान देना और reseller platform का विस्तार करना, लेकिन ये प्रयास गिरावट को रोकने में सफल नहीं रहे। कंपनी पर कुछ फंड लेनदेन को लेकर जांच एजेंसियों की नजर भी पड़ी, जिससे स्थिति और अनिश्चित हो गई। इस बीच संदीप अग्रवाल ने 2015 में पद छोड़ने के बाद Droom नामक एक online वाहन marketplace शुरू किया, जो अब GST जांच का सामना कर रहा है। हालांकि कंपनी का कहना है कि वह सभी नियमों का पालन करेगी। ShopClues की कहानी यह दिखाती है कि केवल तेज growth ही सफलता की गारंटी नहीं होती, बल्कि मजबूत प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण और ग्राहक विश्वास भी उतने ही जरूरी हैं।

