भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की परिसंपत्ति प्रबंधन इकाई एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड के वर्ष 2027 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना है। बैंक के अध्यक्ष चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने मुंबई में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी के आईपीओ को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और वर्ष 2027 में सूचीबद्धता की उम्मीद है।
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र की सबसे चर्चित संभावित सूचीबद्धताओं में से एक मानी जा रही है। कंपनी ने मार्च में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास अपने प्रारूप दस्तावेज पहले ही जमा कर दिए थे। प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के रूप में होगा। इसके तहत मौजूदा शेयरधारक लगभग 20.37 करोड़ शेयर बेचेंगे, जो कंपनी की लगभग 10प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। इस सार्वजनिक निर्गम से करीब ₹.13,000 करोड़ जुटाए जाने की उम्मीद है, जिससे यह भारत के परिसंपत्ति प्रबंधन उद्योग के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है।
प्रस्तावित ढांचे के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक अपनी लगभग 6.3 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगा, जबकि उसकी संयुक्त उपक्रम साझेदार अमुंडी एसेट मैनेजमेंट लगभग 3.7प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश करेगी। वर्तमान में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट में भारतीय स्टेट बैंक की 63 प्रतिशत और अमुंडी एसेट मैनेजमेंट की 37प्रतिशत हिस्सेदारी है। चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय विभिन्न भू-राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रही है और हर वर्ष कारोबार तथा निवेशकों के सामने नई चुनौतियां आती हैं।
उन्होंने निवेशकों को अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव के बजाय भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर ध्यान देने की सलाह दी। सेट्टी ने कहा कि केवल Sensex को देखकर निर्णय लेने के बजाय भारत की विकास गाथा को समझना अधिक महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार भारत अब केवल विकसित अर्थव्यवस्थाओं की बराबरी करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि 21वीं सदी की प्रमुख विकास कहानियों में से एक के रूप में उभर रहा है। यदि यह सूचीबद्धता सफल रहती है तो एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट, एसबीआई कार्ड्स और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के बाद भारतीय स्टेट बैंक की तीसरी सूचीबद्ध सहायक कंपनी बन जाएगी। इससे न केवल कंपनी की बाजार में पहचान बढ़ेगी बल्कि भारतीय परिसंपत्ति प्रबंधन क्षेत्र को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

