मुंबई | बीआर न्यूज नेटवर्क
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गुरुवार को रुपए में बड़ी गिरावट देखने को मिली और यह 95.२० के स्तर के नीचे फिसल गया, जो पिछले बंद स्तर से 32 पैसे की गिरावट दर्शाता है। इसकी वजह अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है। इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर डॉलर के मुकाबले रुपया 94.82 पर खुला। इससे बाद शुरुआती कारोबार में ही डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी देखने को मिली और यह सुबह सवा ग्यारह बजे 0.50 प्रतिशत गिरकर 95.29 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक अस्थिरता और फिर ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट देखी जा रही है। इस साल की शुरुआत से अब तक अमेरिका मुद्रा के मुकाबले भारतीय मुद्रा 5.93 प्रतिशत गिर चुकी है।
महंगाई में होता इजाफा
डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी की एक वजह अमेरिकी फेड के फैसले को भी माना जा रहा है, जिसमें ब्याज दरों को 3.5 प्रतिशत से लेकर 3.75 प्रतिशत के बीच स्थिर रखा गया है। साथ ही कहा कि मध्य पूर्व में तनाव के चलते महंगाई में इजाफा हो रहा है। इससे डॉलर मजबूत हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतें उच्चतम स्तर पर पहुंची
अमेरिका-ईरान में तनाव बढऩे की संभावना के चलते कच्चे तेल की कीमत चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम 6 प्रतिशत से अधिक बढक़र 125 डॉलर प्रति बैरल से अधिक और डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम 3 प्रतिशत से अधिक बढक़र 110 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।
शेयर बाजार में भी गिरावट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि परमाणु समझौते पर पहुंचने तक वह ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाएंगे, जबकि ईरानी अधिकारियों ने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है। इसके अलावा रुपए में गिरावट और कच्चे तेल में तेजी के चलते भारतीय शेयर बाजार भी लाल निशान में थे और सेंसेक्स एवं निफ्टी में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट थी।
क्रूड ऑयल की कीमतें बढऩे से असर
इम्पोर्ट बिल बढ़ा: कच्चे तेल महंगे होने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ा।
जरूरी सामान महंगा: एलपीजी, प्लास्टिक और अन्य पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई प्रभावित।
महंगाई का डर: डॉलर महंगा होने से पेट्रोल-डीजल और इम्पोर्टेड सामान महंगे होंगे, जिससे रिटेल महंगाई बढ़ सकती है।
विदेश में पढ़ाई-घूमना महंगा: विदेश जाने या पढ़ाई के लिए डॉलर खरीदने पर अब ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे।
इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे: मोबाइल, लैपटॉप और आयातित पार्ट्स महंगे हो सकते हैं, क्योंकि भुगतान डॉलर में होता है।

