बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। सौर ऊर्जा के साथ-साथ विकेन्द्रित सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी प्रदेश देश का प्रमुख हब बनकर उभर रहा है। बीते करीब एक साल के भीतर इस क्षेत्र में प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। यह संभव हुआ है प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (कुसुम योजना) के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से। इसकी बदौलत राज्य में कुल 1305 मेगावाट क्षमता के 684 विकेन्द्रित सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल और त्वरित निर्णय क्षमता का ही परिणाम है कि इनमें से 1190 मेगावाट क्षमता के 592 प्लांट मात्र एक साल के भीतर विकसित किए जा चुके हैं। योजना के कंपोनेंट-ए में अधिकतम 2 मेगावाट तथा कंपोनेंट-सी में अधिकतम 5 मेगावाट क्षमता तक के ग्रिड कनेक्टेड प्लांट लगाए जाने का प्रावधान है। कंपोनेंट-सी में संयंत्र स्थापित करने पर केन्द्र सरकार की ओर से प्रति मेगावाट अधिकतम 1 करोड़ 5 लाख रूपए (लागत का 30 प्रतिशत) की सहायता देय है। काबिले गौर यह है कि यह प्लांट उद्योगपतियों अथवा बड़े वाणिज्यिक समूहों द्वारा नहीं लगाए जा रहे हैं। किसानों द्वारा स्वयं अथवा किसी डवलपर के साथ मिलकर खेत के समीप अपनी अनुपजाऊ भूमि पर यह संयंत्र लगाए जा रहे हैं। इन सौर संयंत्रों के माध्यम से अन्नदाता किसान अब ऊर्जादाता भी बन रहे हैं और प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता के नए युग की शुरूआत हुई है।
डिस्कॉम्स को मिल रही सस्ती बिजली: इसके अन्तर्गत बड़े-बड़े सोलर प्लांटों की बजाय ग्रिड कनेक्टेड लघु क्षमता के सौर संयंत्र लगाए जाते हैं। कुसुम योजना में ग्रिड सब स्टेशन से अधिकतम 5 किलोमीटर के दायरे में प्लांट स्थापित किए जाने का प्रावधान है। इनसे पैदा होने वाली बिजली का उपयोग उसी ग्रिड सब स्टेशन पर होने से विद्युत निगमों को अलग से वितरण अथवा प्रसारण तंत्र विकसित करने की आवश्यकता नहीं होती। डिस्ट्रिब्यूशन लॉसेज भी न्यूनतम होते हैं। जिसका लाभ वितरण कंपनियों को सस्ती एवं प्रदूषण रहित बिजली की उपलब्धता के रूप में होता है।
राज्य में कुसुम कंपोनेंट-ए के अन्तर्गत 457 मेगावाट क्षमता के 354 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं कम्पोनेंट-सी में 848 मेगावाट क्षमता के 330 सौर संयंत्र लग चुके हैं। यह प्रगति इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि दिसम्बर 2023 में वर्तमान सरकार के गठन से पूर्व प्रदेश में कुसुम योजना के दोनों घटकों को मिलाकर 123 मेगावाट क्षमता ही सृजित हो पाई थी। गत सरकार के समय कम्पोनेंट-ए में 119 मेगावाट के 91 प्लांट लगे थे। वहीं कुसुम कम्पोनेंट-सी में तो 4 मेगावाट क्षमता का मात्र एक प्लांट ही स्थापित किया जा सका था।
राज्य में योजना के सफल क्रियान्वयन को देखते हुए भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने कुसुम कम्पोनेंट-ए में वित्त वर्ष 2024-25 में 397 मेगावाट तथा वर्ष 2025-26 में 5 हजार मेगावाट क्षमता का आवंटन बढ़ाया है। वहीं कम्पोनेंट-सी में दोनों वर्षों में कुल 2 लाख सोलर पंप क्षमता का अतिरिक्त आवंटन किया है। केन्द्र सरकार ने इस योजना के तहत अब तक राजस्थान को कम्पोनेंट-ए में कुल 5,500 मेगावाट तथा कम्पोनेंट-सी में 4 लाख सोलर पंप के लक्ष्य आवंटित किए हैं।
पूर्व में प्रदेश में घटक-ए का क्रियान्वयन राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के माध्यम से किया जाता था। लेकिन बाद में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में 23 जुलाई 2024 से कंपोनेंट-सी के साथ-साथ कंपोनेंट-ए का भी क्रियान्वयन वितरण कंपनियों को सुपुर्द कर दिया गया।

