नई दिल्ली,
भारत में संगठित निजी क्षेत्र की नौकरियों में वर्ष 2026 की शुरुआत सकारात्मक रही है। Jan महीने में वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़त मुख्य रूप से गैर-आईटी क्षेत्रों और नए उम्मीदवारों की भर्ती में तेजी के कारण संभव हुई है। यह जानकारी नौकरी से जुड़े एक प्रमुख सूचकांक की रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई। बीपीओ और आईटीईएस क्षेत्र में 21 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। आतिथ्य और यात्रा क्षेत्र में 15 प्रतिशत से अधिक की बढ़त हुई, जबकि बीमा क्षेत्र में 7 प्रतिशत से अधिक और स्वास्थ्य सेवाओं में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई। हालांकि बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं आईटी क्षेत्र Jan महीने में लगभग स्थिर रहा। इसके विपरीत कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग से जुड़े पदों में 34 प्रतिशत से अधिक की मजबूत वृद्धि देखी गई, जो नई तकनीकों की बढ़ती मांग को दर्शाती है।
पिछले तीन महीनों से बीपीओ और आईटीईएस क्षेत्र लगातार दो अंकों की वृद्धि के साथ शीर्ष क्षेत्रों में शामिल रहा है। Jan 2026 में इस क्षेत्र में कुल 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई। नए उम्मीदवारों की भर्ती में 39 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई, जबकि 13 से 16 वर्ष के अनुभव वाले पेशेवरों की भर्ती में 9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। गैर-मेट्रो शहर इस वृद्धि के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। जयपुर में 66 प्रतिशत से अधिक और अहमदाबाद में 43 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि बड़े महानगरों के साथ-साथ उभरते शहरों में भी रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भर्ती गतिविधियों में 80 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बीपीओ, आतिथ्य और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में लगातार वृद्धि रोजगार बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। साथ ही भारतीय आईटी कंपनियों का स्थिर प्रदर्शन भी आने वाले महीनों में रोजगार परिदृश्य को मजबूती दे सकता है। भौगोलिक दृष्टि से पुणे में 23 प्रतिशत से अधिक, चेन्नई में 18 प्रतिशत, बेंगलुरु में 17 प्रतिशत और अहमदाबाद में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे यह संकेत मिलता है कि दक्षिण और पश्चिम भारत के शहर रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

