New Delhi,
सरकारी क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनी ओएनजीसी (ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन) ने हाल ही में जारी किए गए जैक-अप रिग के लिए टेंडर को रद्द करने के अपने फैसले पर स्पष्टीकरण दिया है। कंपनी ने कहा कि यह निर्णय कीमतों में असामान्यता और संभावित मिलीभगत वाली बोली प्रक्रिया को देखते हुए लिया गया है। यह बयान उस मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें टेंडर रद्द किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे। ओएनजीसी ने स्पष्ट किया कि वह सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया के स्थापित सिद्धांतों का पालन करती है, जिसमें पारदर्शिता, निष्पक्षता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्राथमिकता दी जाती है।
कीमतों में 60 प्रतिशत तक की तेज वृद्धि
कंपनी के अनुसार, टेंडर के मूल्यांकन के दौरान कीमतों में असामान्य रूप से तेज वृद्धि देखी गई। करीब नौ महीनों के भीतर दैनिक दरें 35,606 डॉलर से बढ़कर 56,195 डॉलर तक पहुंच गईं, जो लगभग 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। ओएनजीसी ने इसे सामान्य और प्रतिस्पर्धात्मक बाजार व्यवहार से परे बताया। कंपनी ने यह भी कहा कि सभी प्रतिभागियों से वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक बोली की अपेक्षा की जाती है, जबकि किसी भी प्रकार की अनुचित व्यापारिक गतिविधियां जैसे शिकारी मूल्य निर्धारण या मिलीभगत वाली बोली को हतोत्साहित किया जाता है। ओएनजीसी ने बताया कि समग्र बोली पैटर्न और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए मिलीभगत की आशंका भी सामने आई। एक जिम्मेदार सार्वजनिक खरीदार के रूप में कंपनी का दायित्व था कि इन पहलुओं की गहन जांच की जाए, जिसके बाद टेंडर रद्द करने का निर्णय लिया गया।
सार्वजनिक धन और प्रक्रिया की शुचिता पर जोर
कंपनी ने दोहराया कि यह कदम संगठन के हितों की रक्षा, सार्वजनिक धन के विवेकपूर्ण उपयोग और खरीद प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। ओएनजीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल कीमतों की तर्कसंगतता, प्रतिस्पर्धा की निष्पक्षता और निर्धारित नियमों के पालन के आधार पर लिया गया है, इसमें किसी बाहरी प्रभाव की भूमिका नहीं है। कंपनी ने आगे कहा कि वह उद्योग के साथ पारदर्शी संवाद बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती रहेगी, साथ ही कार्टेल जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। ओएनजीसी के शेयरों में बुधवार को तेजी देखने को मिली। एनएसई पर कंपनी का शेयर 0.68 प्रतिशत बढ़कर 285.05 रुपये के इंट्रा-डे उच्च स्तर तक पहुंच गया।

