New Delhi,
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को करीब 3 प्रतिशत तक की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले सत्र की गिरावट के बाद यह उछाल देखने को मिला है, जिसका मुख्य कारण Strait of Hormuz में उत्पन्न बाधा और उससे जुड़ी आपूर्ति संबंधी चिंताएं हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट कच्चा तेल वायदा लगभग 2.98 प्रतिशत बढ़कर 103.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल करीब 3.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ 96.36 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया। यह आंकड़े सुबह लगभग 9:45 बजे के आसपास के हैं। इससे पहले के सत्र में ब्रेंट कच्चा तेल 2.8 प्रतिशत गिरावट के साथ बंद हुआ था, वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में लगभग 5 प्रतिशत की कमी आई थी, हालांकि दिन के शुरुआती कारोबार में दोनों में करीब 4 प्रतिशत तक की तेजी भी देखी गई थी।
Strait of Hormuz बना प्रमुख चिंता का कारण
Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का व्यापार होता है। वर्तमान में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के तीसरे सप्ताह में प्रवेश के साथ इस क्षेत्र में बाधाएं बढ़ गई हैं। इस स्थिति ने वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति में कमी, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई के बढ़ने की आशंकाओं को और अधिक मजबूत कर दिया है। हालांकि साप्ताहिक आधार पर देखा जाए तो तेल कीमतों में अधिक बदलाव नहीं हुआ है। ब्रेंट कच्चा तेल पिछले शुक्रवार के स्तर के आसपास ही बना रहा, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में इस अवधि के दौरान 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौते
इस बीच, अमेरिका ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ लगभग 56–57 अरब डॉलर के ऊर्जा समझौते किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य सहयोगी देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। यह निर्णय अमेरिका के नेतृत्व में आयोजित ऊर्जा सुरक्षा सम्मेलन के दौरान लिया गया, जिसमें कई क्षेत्रीय देशों ने भाग लिया। अमेरिकी प्रशासन ने यह भी जानकारी दी कि संघर्ष के बावजूद ईरान के तेल टैंकरों को Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति दी गई है, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके।
भारत सहित एशियाई देशों पर प्रभाव
विश्लेषकों के अनुसार, भारत सहित कई एशियाई अर्थव्यवस्थाएं इस स्थिति से अधिक प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि ये देश खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भर हैं। आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर इन देशों की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है। मंगलवार के कारोबार के दौरान घरेलू शेयर बाजार में भी अस्थिरता देखने को मिली। Sensex और Nifty दोनों सूचकांक ऊंचे उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार करते नजर आए, जिस पर वैश्विक संकेतों और तेल कीमतों की तेजी का प्रभाव स्पष्ट दिखा।

