केंद्र ने कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए किए उपाय
10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी आयात की होगी अनुमति
त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले सरकार का बड़ा फैसला
नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने गुरुवार को 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी शून्य शुल्क पर आयात करने की अनुमति दी। इस कदम के जरिए सरकार की कोशिश कीमतों को नियंत्रण में रखना है। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में बताया गया कि टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) के तहत 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी बिना किसी शुल्क के 31 अक्टूबर, 2026 तक आयात की जा सकती है। यह बीते एक दशक में पहला मौका है, जब भारत विदेशों से चीनी आयात करने जा रहा है।
सरकार की ओर से यह फैसला त्योहारी सीजन के शुरू होने से पहले लिया गया है, जब देश में मिठाइयों की मांग पीक पर होने के कारण चीनी की मांग काफी बढ़ जाती है। रिपोट्र्स के मुताबिक, देश में बीते दो महीनों में चीनी की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है, जिस वजह से भारत को चीनी आयात करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इससे पहले सरकार देश में चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए कई कदम उठा चुकी हैं। हाल ही में सरकार ने चीनी के बड़े खरीदारों और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 15 दिन कर दी है।
1 सितंबर से 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा आदेश
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नया आदेश 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। इसका उद्देश्य जमाखोरी पर रोक लगाना और बाजार में चीनी की आपूर्ति बनाए रखना है। नए नियम के तहत, जो भी औद्योगिक या संस्थागत उपभोक्ता हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग कच्चे माल, उत्पादन या उपभोग के लिए करता है, वह अपनी 15 दिनों की आवश्यकता से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर सकेगा।
सरकार ने लागू की 15 दिन की स्टॉक लिमिट
त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चीनी के बड़े खरीदारों और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 15 दिन कर दी है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नया आदेश 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा, जिसका उद्देश्य जमाखोरी पर रोक लगाना और बाजार में चीनी की आपूर्ति बनाए रखना है। नए नियम के तहत, जो भी औद्योगिक या संस्थागत उपभोक्ता हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग कच्चे माल, उत्पादन या उपभोग के लिए करता है, वह अपनी 15 दिनों की आवश्यकता से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर सकेगा।
हलवाई व शीतल पेज निर्माताओं की अलग श्रेणी बनाई
सरकार ने मिठाई निर्माता, कन्फेक्शनरी उद्योग, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, हलवाई व्यवसायों और अन्य संस्थागत खरीदारों को इस श्रेणी में शामिल किया है। ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान पिछले एक वर्ष की औसत मासिक खपत के आधार पर की जाएगी। हालांकि, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और स्थानीय निकायों से संबंधित संस्थाओं को इस आदेश से छूट दी गई है।
चीनी मिलों से सीधे बेची गई चीनी का होगा सत्यापन
सरकार ने यह भी कहा है कि प्रत्येक चीनी मिल द्वारा बड़े उपभोक्ताओं को सीधे या डीलरों के माध्यम से बेची गई चीनी की मात्रा का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न और चीनी से संबंधित एचएसएन कोड का उपयोग किया जाएगा।
चीनी का औसत खुदरा मूल्य बढ़ा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 20 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा मूल्य बढक़र 52.30 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 46.34 रुपए प्रति किलोग्राम था। यानि चीनी की कीमतों में सालाना आधार पर लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

