Wednesday, May 20, 2026 |
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RBI की पहल: NBFC के ढांचे में होगा बदलाव

प्रक्रिया सरल, पारदर्शिता बढ़ाने और प्रणालीगत जोखिम को कम करने का होगा प्रयास

by Business Remedies
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एक लाख करोड़ रुपए या इससे अधिक परिसंपत्ति वाली एनबीएफसी को ‘अपर लेयर’ में लाया जाएगा
बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एनबीएफसी कंपनियों (नॉन-बैंकिंग फिनेंशियल कंपनी) के वर्गीकरण में पिछले दिनों बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। इस प्रस्ताव के क्रियान्वयन के लिए एनबीएफसी, आम लोगों और अन्य सभी संबंधित हितधारकों से प्रतिक्रिया भी मांगी है। इसके तहत 1 लाख करोड़ रुपए या इससे अधिक की संपत्ति वाली संस्थाओं को सीधे ‘अपर लेयर’ में शामिल किया जाएगा, जिसमें अब सरकारी एनबीएफसी भी शामिल होंगी। इस कदम का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और प्रणालीगत जोखिम को कम करना है, जिसके तहत अब स्कोरिंग की जगह केवल संपत्ति के आकार को मुख्य मानदंड बनाया जाएगा।

एनबीएफसी से क्या है तात्पर्य
एनबीएफसी को उनके आकार, गतिविधियों और जोखिम के आधार पर चार स्तरों आधार स्तर, मध्य स्तर, उच्च स्तर और शीर्ष स्तर पर वर्गीकृत किया गया है।
आधार स्तर- इसमें 1000 करोड़ रुपए से कम की संपत्ति वाले शामिल हैं, जैसे कि पी2पी लेंडिंग प्लेटफॉर्म, अकाउंट एग्रीगेटर और नॉन-ऑपरेटिव फिनेंशियल होल्डिंग कंपनियां हैं।
मध्य स्तर- इसमें 1000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति वाले शामिल हैं, जैसे कि डिपॉजिट-टेकिंग, कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियां और हाउसिंग फिनेंस कंपनियां हैं।
उच्च स्तर- इसमें मध्य स्तर के शामिल हैं, जो प्रणालीगत जोखिम के कारण उच्च विनियमन के अधीन हैं।
शीर्ष स्तर- यह स्तर खाली रहता है और उच्च स्तर के एनबीएफसी को इसमें शामिल किया जा सकता है, यदि उनका प्रणालीगत जोखिम बढ़ जाता है।

मानदंड के बदलाव
आरबीआई ने एनबीएफसी के लिए नेट ओन्ड फंड (एनओएफ) की आवश्यकता को 10 करोड़ रुपए तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। एनपीए वर्गीकरण को 90 दिनों से अधिक के बकाया के रूप में परिभाषित किया गया है। एनबीएफसी को अपने निदेशक मंडल में कम से कम एक बैंक/एनबीएफसी अनुभव वाले निदेशक की आवश्यकता होगी।

कई कंपनियां आ सकती हैं अपर लेयर में
टाटा संस, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, टाटा कैपिटल और आदित्य बिड़ला फाइनेंस जैसी कंपनियां सीधे इस ‘अपर लेयर’ में शामिल हो सकती हैं। अपर लेयर में आने पर इन कंपनियों को बेहतर शासन और प्रकटीकरण मानकों का पालन करना होगा। भारी संपत्ति वाली कंपनियों पर कड़ी नजर रखने से वित्तीय स्थिरता बनी रहेगी।



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