भारत विविधताओं का देश है। यहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं, जातियां, संस्कृतियां और परंपराएं विद्यमान हैं, फिर भी एक राष्ट्र के रूप में हमारी पहचान हमारी एकता में निहित है। इसी राष्ट्रीय एकता, अखंडता और संप्रभुता के महत्व को उजागर करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष आज के दिन राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता रहा है। यह दिवस भारत के लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का विशेष अवसर भी है। राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष, 2014 में भारत सरकार की ओर से की गई थी। इसका प्रथम आयोजन 31 अक्टूबर, 2014 को किया गया। इस पहल के पीछे मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता के बाद देश की 562 रियासतों के एकीकरण में सरदार पटेल के अतुलनीय योगदान को स्मरण करना तथा देशवासियों में राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना को सुदृढ़ करना था। सरदार पटेल के दृढ़ नेतृत्व, दूरदर्शिता और कूटनीतिक कौशल ने भारत को विखंडित होने से बचाकर एक मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इस दिवस की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। आज देश को क्षेत्रवाद, जातिवाद, भाषावाद, सांप्रदायिकता, आतंकवाद और सामाजिक वैमनस्य जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली भ्रामक सूचनाएं भी सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करती हैं। ऐसे समय में राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि हमारी वास्तविक शक्ति आपसी भाईचारे, सहिष्णुता, सहयोग और संवैधानिक मूल्यों में निहित है। विविधता हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी ताकत है। राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने के लिए सरकार की ओर से भी अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। इस अवसर पर देशभर में रन फॉर यूनिटी, राष्ट्रीय एकता की शपथ, पुलिस एवं सुरक्षा बलों की मार्च-पास्ट तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का अवसर है। राष्ट्र की एकता केवल सरकारी प्रयासों से सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

