Home Corporate Worldअंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर Muthoot Group ने फिल्म के जरिए महिलाओं की सकारात्मक भूमिका पर प्रकाश डाला

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर Muthoot Group ने फिल्म के जरिए महिलाओं की सकारात्मक भूमिका पर प्रकाश डाला

by Business Remedies
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बिजऩेस रेमेडीज/New Delhi  |  महिला दिवस के अवसर पर The Muthoot Group ने उन असाधारण महिलाओं को समर्पित एक भावनात्मक फिल्म प्रस्तुत की है, जो चुपचाप हमारे रोज़मर्रा के जीवन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस फिल्म के माध्यम से The Muthoot Group उन महिलाओं के अमूल्य योगदान को सम्मान देता है, जो परिवार और कार्यस्थल दोनों को समान रूप से संभालती हैं।

फिल्म महिलाओं के उन अनदेखे और निरंतर प्रयासों को उजागर करती है, जिनसे वे घर, परिवार की देखभाल और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखती हैं—ताकि जीवन हर दिन सुचारु रूप से आगे बढ़ता रहे। एक रोचक और विचारोत्तेजक कहानी के माध्यम से फिल्म में भूमिकाओं के उलटफेर को दिखाया गया है। इसमें एक पुरुष की कहानी दिखाई गई है, जो अचानक खुद को उन दैनिक जिम्मेदारियों का सामना करते हुए पाता है जिन्हें आमतौर पर उसके जीवन की महिला निभाती है। सुबह सबसे पहले उठने से लेकर खाना बनाना, बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना, कपड़े प्रेस करना, घर संभालना और फिर अपने काम के लिए भागना—वह इन सभी जिम्मेदारियों को निभाने की कोशिश करता है, लेकिन लगातार आने वाले कामों के बीच खुद को संभालना उसके लिए मुश्किल हो जाता है।

दिन का अंत एक शांत पारिवारिक डिनर के साथ होता हुआ लगता है, लेकिन जैसे ही वह सोचता है कि दिन खत्म हो गया है, उसे याद दिलाया जाता है कि अभी कई काम बाकी हैं—जैसे बच्चों का स्कूल प्रोजेक्ट, ऑफिस के अधूरे काम और अन्य जिम्मेदारियाँ। बढ़ते दबाव से घबराकर वह अचानक जाग जाता है और समझता है कि यह सब सिर्फ एक बुरा सपना था। लेकिन राहत का वह पल जल्द ही उसे सोचने पर मजबूर कर देता है। उसे एहसास होता है कि जो काम उसे सिर्फ एक दिन के लिए भारी लगे, वही उसकी जिंदगी की महिला रोज़ करती है—लगातार, अक्सर बिना किसी पहचान या प्रशंसा के, और कई बार इसे स्वाभाविक मान लिया जाता है।

इस पहल पर Alexander George Muthoot, जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर, The Muthoot Group ने कहा कि इस सरल लेकिन प्रभावशाली कहानी के माध्यम से यह फिल्म महिलाओं के अदृश्य प्रयास, भावनात्मक शक्ति और समर्पण को सम्मान देती है। यह हमें रुककर उन योगदानों की सराहना करने की याद दिलाती है जो अक्सर नजर नहीं आते, लेकिन परिवार, समाज और कार्यस्थलों को आगे बढ़ाने में बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। हमारे संगठन में भी 11,500 से अधिक महिलाएँ समर्पण के साथ कार्य कर रही हैं, जो हमारे कुल कार्यबल का लगभग 22 प्रतिशत हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारी संस्था में 1,175 से अधिक महिलाएँ ब्रांच हेड के रूप में नेतृत्व कर रही हैं, जबकि कई अन्य विभिन्न विभागों में प्रमुख नेतृत्व भूमिकाओं में हैं। मुथूट ग्रुप को लगातार 5 वर्षों से ‘Great Place To Work’ के रूप में मान्यता मिली है और TRA की Brand Trust Report के अनुसार 10 वर्षों से भारत का नंबर 1 सबसे विश्वसनीय financial service brand भी माना गया है। इसके अलावा, Muthoot Finance को 2024 और 2025 में प्रतिष्ठित FICCI महिला सशक्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

इस पहल पर अपनी बात रखते हुए Abhinav Iyer, सीनियर जनरल मैनेजर-Marketing एवं Strategy ने कहा कि प्रभावशाली brand और product communication के साथ-साथ, The Muthoot Group फिल्मों के माध्यम से उन लोगों का सम्मान करने की कोशिश करता है जो चुपचाप हमारे समाज को आकार देते हैं। पिछले दिवाली पर हमने अपने देश के सैनिकों को समर्पित एक फिल्म बनाई थी, जिसे पूरे देश में दर्शकों से काफी सराहना मिली। इस बार हमने अपने घर के करीब नजर डाली है और अपने जीवन की महिलाओं पर ध्यान केंद्रित किया है—जिनकी ताकत, निस्वार्थता और शांत त्याग हर दिन परिवारों को जोडक़र रखते हैं। इस फिल्म के माध्यम से हम उम्मीद करते हैं कि लोग महिलाओं की भूमिका के प्रति आभार और सम्मान का भाव महसूस करेंगे।

ऐसे समय में जब financial services का क्षेत्र अक्सर केवल लेन-देन तक सीमित दिखाई देता है, The Muthoot Group लोगों से जुडऩे के लिए ऐसी अर्थपूर्ण कहानियों का सहारा लेता है जो वास्तविक जीवन के अनुभवों को दर्शाती हैं। महिलाओं की रोज़मर्रा की ताकत और दृढ़ता का जश्न मनाकर समूह अपने दर्शकों के साथ एक गहरा भावनात्मक संबंध स्थापित करना चाहता है—सिर्फ products और services से आगे बढक़र उन लोगों को सम्मान देने के लिए जो हमारे जीवन को आकार देते हैं। इस पहल के साथ, The Muthoot Group महिलाओं की शक्ति, दृढ़ता और अमूल्य योगदान का जश्न मनाने के अपने संकल्प को दोहराता है—सिर्फ महिला दिवस पर नहीं, बल्कि हर दिन।



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