बिजऩेस रेमेडीज/मुंबई भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के वाणिज्यिक क्रेडिट पोर्टफोलियो में वर्ष-दर-वर्ष (YoY) 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कुल क्रेडिट एक्सपोजर 31 मार्च 2025 तक 35.2 लाख करोड़ तक पहुँच गया। यह प्रवृत्ति मुख्य रूप से मौजूदा उधारकर्ताओं को ऋण आपूर्ति में वृद्धि के कारण देखने को मिली, ऐसा ट्रांसयूनियन सिबिल और सिडबी की मई 2025 की रूस्रूश्व पल्स रिपोर्ट में कहा गया है। MSME क्षेत्र में वे उधारकर्ता शामिल हैं जिनका क्रेडिट एक्सपोजर ?50 करोड़ तक होता है। समग्र ऋण पोर्टफोलियो में वृद्धि के साथ-साथ बैलेंस-लेवल गंभीर चूक (90 से 720 दिन की बकाया राशि (डीपीडी) के रूप में मापी गई और सब-स्टैंडर्ड के रूप में रिपोर्ट की गई) में सुधार हुआ, जो कि पिछले पाँच वर्षों में सबसे निचला स्तर है।
क्रेडिट प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है, बैलेंस-लेवल डिलिंक्वेंसी में गिरावट दर्ज : कुल MSME बैलेंस-लेवल डिलिंक्वेंसी मार्च 2025 में घटकर 1.8 प्रतिशत हो गई, जो मार्च 2024 में 2.1 प्रतिशत थी — यानी 35 बेसिस प्वाइंट की गिरावट। इस सुधार का प्रमुख कारण 50 लाख से 50 करोड़ के एक्सपोजर वाले उधारकर्ता वर्ग में सुधार रहा। हालांकि, 10 लाख तक के एक्सपोजर वाले उधारकर्ता वर्ग में डिलिंक्वेंसी में हल्की वृद्धि देखी गई, जो मार्च 2024 में 5.1 प्रतिशत थी और मार्च 2025 में बढक़र 5.8 प्रतिशत हो गई। इसी तरह, 10 लाख से 50 लाख तक के एक्सपोजर वाले उधारकर्ताओं की श्रेणी में भी डिलिंक्वेंसी स्तर थोड़ा बढक़र 2.9 प्रतिशत हो गया, जो मार्च 2024 में 2.8 प्रतिशत था।
MSME Credit ग्रोथ की गति बनी हुई है मजबूत : वाणिज्यिक क्रेडिट की मांग, जिसे पूछताछों की संख्या के आधार पर मापा जाता है, मार्च 2025 में समाप्त तिमाही में वर्ष-दर-वर्ष (YoY) 11 प्रतिशत बढ़ी। वाणिज्यिक क्रेडिट की आपूर्ति (मूल्य के अनुसार) वित्त वर्ष 2024-25 में 3 प्रतिशत YoY बढ़ी। हालांकि, जनवरी से मार्च 2025 की तिमाही में क्रेडिट की आपूर्ति में 11 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जिसका संभावित कारण बाहरी चुनौतियों के कारण उधारदाताओं की बढ़ती चिंताएँ रही। इस ऋण वितरण में सुस्ती के बावजूद, नई नकद क्रेडिट सुविधाओं के माध्यम से दिया गया ऋण मजबूत बना रहा और इसी तिमाही में इसमें 7 प्रतिशत ङ्घशङ्घ वृद्धि दर्ज की गई। मार्च 2025 तक कुल नए ऋण वितरणों में न्यू-टू-क्रेडिट MSME उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत बनी रही, हालांकि यह एक साल पहले 51 प्रतिशत थी। मार्च 2025 में समाप्त तिमाही के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 60 प्रतिशत न्यू-टू-क्रेडिट ऋण वितरण किए। व्यापार क्षेत्र ने न्यू-टू-क्रेडिट उधारकर्ताओं में सबसे अधिक योगदान दिया, जो 53त्न रहा। वहीं, विनिर्माण क्षेत्र में न्यू-टू-क्रेडिट उधारकर्ताओं की संख्या में वाणिज्यिक ऋण प्राप्त करने के मामले में सबसे अधिक 70 प्रतिशत की ङ्घशङ्घ वृद्धि दर्ज की गई।

