Thursday, February 19, 2026 |
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वैश्विक तनाव घटते ही बाजार में सुधार, रुपया न्यूनतम स्तर से उबरा

by Business Remedies
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Indian Rupee Showing Recovery Against US Dollar Amid Global Developments

नई दिल्ली,

ग्रीनलैंड से जुड़े तनाव में रातोंरात नरमी के संकेत मिलने के बाद बाजार भावना को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि निकट अवधि में रुपये में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन हाल के तेज गिरावट वाले रुझान की तुलना में अब मूल्यह्रास अधिक क्रमिक रहने की संभावना है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अपने अब तक के न्यूनतम स्तर से उबरते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे मजबूत होकर 91.50 पर पहुंच गया। हाल के सत्रों में वैश्विक और घरेलू कारकों के संयुक्त प्रभाव से रुपये पर दबाव बना हुआ था।

डीबीएस बैंक की कार्यकारी निदेशक और वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार, पिछले वर्ष से चली आ रही नकारात्मक धारणा को वैश्विक अनिश्चितताओं ने और बढ़ाया। वैश्विक अस्थिरता सूचकांक में तेज बढ़ोतरी ने विभिन्न बाजार संकेतकों में कमजोरी को दर्शाया, जिसे प्रतिकूल भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल में उछाल ने और गहरा किया। ऐसे माहौल में ग्रीनलैंड तनाव में कमी के संकेत बाजारों के लिए राहतकारी साबित हो सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपीय संघ के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता अंतिम चरण में है और इसके अगले सप्ताह तक अंतिम रूप लेने की संभावना है। इसके अलावा, विश्व आर्थिक मंच की डावोस बैठक से अमेरिका-व्यापार वार्ता को लेकर सकारात्मक टिप्पणियों के बाद कुछ आशावाद फिर से उभरा है।

घरेलू स्तर पर रुपये पर दबाव ऐसे समय में आया है जब आर्थिक वृद्धि मजबूत दिखाई दे रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही का औसत विकास दर 8 प्रतिशत रहा है, जबकि पूरे FY26 के लिए 7.5 प्रतिशत से अधिक वृद्धि का अनुमान जताया गया है। मजबूत आर्थिक वृद्धि के बावजूद बाहरी प्रवाह में कमजोरी चिंता का विषय बनी हुई है। कमजोर मुद्रा से निर्यातकों को कुछ राहत मिलती है, खासकर उन क्षेत्रों को जो ऊंचे शुल्क से प्रभावित हैं, लेकिन इसके कारण अर्थव्यवस्था के अन्य हिस्सों में असंतुलन भी पैदा होता है। चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग -1.0 से -1.2 प्रतिशत के आसपास प्रबंधनीय रहने का अनुमान है, परंतु पूंजी प्रवाह अधिक चिंता का कारण बना है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष2025 में शुद्ध पूंजी बहिर्वाह के बाद इस वर्ष इक्विटी बाजारों से लगभग 3 अरब डॉलर की निकासी देखी गई है, जबकि बॉन्ड बाजार में निवेशकों की रुचि सीमित रही। शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है, लेकिन पुनर्प्रेषण दबाव के कारण सकल निवेश के मुकाबले अंतर बना हुआ है। आगामी बजट में राजकोषीय प्रोत्साहन अधिक स्पष्ट हो सकता है, क्योंकि FY27 में केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त उधार में वृद्धि की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और व्यापार समझौते आगे बढ़ते हैं, तो रुपया धीरे-धीरे स्थिरता की ओर लौट सकता है।



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