संकट में भारत की 800 से ज्यादा कंपनियां
ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध का असर
बिजनेस रेमेडीज/ जयपुर/ नई दिल्ली।
ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध से करीब 800 से ज्यादा भारत की कंपनियां संकट में हैं। जहां अमेरिका के बाद यूएई में भारतीय कंपनियों का सबसे ज्यादा निवेश है। ऐसे में यहां बहुत-सी कंपनियों ने अलग-अलग सेक्टर में निवेश किया है। अब इनमें से भारत की 800 छोटे और मध्यम वर्ग की कंपनियों के निवेश पर खतरा दिखाई दे रहा है। वहीं कई छोटी भारतीय कंपनियों के पास युद्ध जोखिम बीमा नहीं है, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान होने की आशंका है। इस कारण से हजारों करोड़ रुपए का निवेश खत्म हो सकता है। इस युद्ध के कारण यात्रा से लेकर एक्सपोर्ट सेक्टर तक प्रभावित हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति 1990 की खाड़ी युद्ध की याद दिलाती है और यदि यह संकट लंबे समय तक चलता है, तो भारत की 10,000 से अधिक कंपनियों को परिचालन बंद करने की नौबत आ सकती है।
रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर
आंकड़े बताते हैं कि कंपनियों ने पिछले छह महीनों में संयुक्त अरब अमीरात में करीब 12000 करोड़ रुपए का निवेश किया था, जो अब युद्ध के कारण संकट में है। सबसे ज्यादा असर रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की कंपनियों पर है, जहां 280 भारतीय कंपनियों ने करीब 400 मिलियन डॉलर का निवेश किया था। आंकड़े बताते हैं कि यह खतरा इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि पिछले दो सालों में यूएई, अमेरिका के बाद भारतीय कंपनियों के लिए दूसरा सबसे बड़ा फॉरेन इन्वेस्टमेंट की जगह रहा है। वहीं यह भी कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में निवेश करने वाली बड़ी कंपनियों की तुलना में इन छोटी कंपनियों को अधिक जोखिम का सामना करना पड़ता है। इसका कारण नुकसान सहन करने की सीमित वित्तीय क्षमता ना होना है।
कई कंपनियों का अटका निवेश
जहां युद्ध से दुबई की बड़ी परफ्यूम कंपनी ‘अजमल इंडस्ट्री’ भी प्रभावित हुई है। वहीं मुंबई की कॉफी रोस्टर कंपनी ‘सब को कॉफी’ ने संयुक्त अरब अमीरात में अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के फंडिंग के लिए 210,000 डॉलर भेजे थे। लाइफस्टाइल ब्रांड ब्रह्म लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स ने 20 लाख डॉलर का निवेश किया था, जबकि एक अन्य हॉस्पिटैलिटी कंपनी इडम नेचुरल वेलनेस ने इस साल की शुरुआत में करीब 680,000 डॉलर का निवेश किया था।
कईयों के पास एक्टिव वॉर बीमा पॉलिसी नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि इन कंपनियों को नुकसान और व्यावसायिक व्यवधानों का सामना करना पड़ सकता है। सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इनमें से ज्यादातर छोटी कंपनियों के पास कोई एक्टिव वॉर बीमा पॉलिसी नहीं है। इस कारण इनके लिए और भी बड़ा खतरा बढ़ चुका है।




