नई दिल्ली,
केंद्र सरकार के बजट 2026-27 के बाद भारत का पर्यटन क्षेत्र तेज रफ्तार से आगे बढ़ने की स्थिति में है। बजट में संस्थागत क्षमता मजबूत करने, सेवा गुणवत्ता सुधारने और पर्यटन स्थलों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए कई लक्षित कदम प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इन उपायों से पर्यटन उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी।
पर्यटन क्षेत्र को रोजगार सृजन, विदेशी मुद्रा आय और संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। आधिकारिक तथ्य पत्र के अनुसार, आतिथ्य, परिवहन, हस्तशिल्प और संबद्ध सेवाओं में आजीविका के अवसर पैदा करने की इसकी क्षमता को देखते हुए बजट में इसे रणनीतिक वृद्धि चालक के रूप में चिन्हित किया गया है। पर्यटन मंत्रालय द्वारा जारी ‘इंडिया टूरिज्म डाटा कम्पेंडियम 2025’ के अनुसार, यह क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में कुल प्रभाव के रूप में 5.22 प्रतिशत का योगदान देता है, जबकि प्रत्यक्ष हिस्सेदारी 2.72 प्रतिशत है। रोजगार के क्षेत्र में यह कुल रोजगार का 13.34 प्रतिशत समर्थन करता है, जिसमें प्रत्यक्ष रोजगार की हिस्सेदारी 5.82 प्रतिशत है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि यह क्षेत्र समावेशी विकास और आजीविका सृजन में अहम भूमिका निभा रहा है।
बजट के बाद जिन प्रमुख पहलों को लागू किया जाएगा, उनमें पर्यटन स्थलों का विकास और आधुनिकरण शामिल है। विरासत और अनुभवात्मक स्थलों के विकास, पर्यटन परिसंपत्तियों के लिए डिजिटल ज्ञान तंत्र तैयार करने तथा प्रकृति और वन्यजीव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाएं शामिल हैं। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में मंदिरों और मठों के संरक्षण, तीर्थ केंद्रों के निर्माण तथा संपर्क और सुविधाओं में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पूर्वोदय राज्यों में पांच प्रमुख पर्यटन स्थलों का विकास किया जाएगा और संपर्क सुविधा के लिए 4,000 ई-बसें चलाई जाएंगी।
इसके अलावा, भारत को चिकित्सीय पर्यटन सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाने के उद्देश्य से पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और उन्हें जीवंत सांस्कृतिक स्थलों में बदलने के लिए 15 ऐतिहासिक स्थलों का विकास किया जाएगा, जिनमें लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, अडिचनल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस शामिल हैं। पर्यावरण पर्यटन के क्षेत्र में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को मजबूत करने के लिए देश 95 देशों के नेताओं और मंत्रियों की भागीदारी के साथ पहला ग्लोबल बिग कैट समिट आयोजित करेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और सुदृढ़ होगी।
कौशल विकास पर भी विशेष जोर दिया गया है। आतिथ्य के क्षेत्र में कौशल अंतर को दूर करने और शैक्षणिक प्रशिक्षण को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान स्थापित किया जाएगा। साथ ही प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10,000 पर्यटक मार्गदर्शकों को उन्नत प्रशिक्षण देने के लिए एक पायलट कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। समग्र रूप से बजट 2026-27 में पर्यटन क्षेत्र को देश की आर्थिक संरचना में मजबूत और उच्च प्रभाव वाले क्षेत्र के रूप में स्थापित किया गया है। इसमें रोजगार सृजन, निवेश प्रोत्साहन और सतत विकास पर स्पष्ट ध्यान दिया गया है। वर्तमान stock market update में भी पर्यटन और आतिथ्य से जुड़ी कंपनियों में सकारात्मक रुझान देखा जा रहा है, जबकि nifty और sensex में क्षेत्र से संबंधित अंकों में हलचल दर्ज की गई है।

