वैश्विक अनिश्चिताओं के बीच भारत की वर्ष, 2025 की शुरुआत आर्थिक दृष्टि से मजबूत रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की वर्ष, 2025 में आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी। इस वर्ष की तीसरी तिमाही में कई आर्थिक संकेतक अच्छे रहे है, जैसे जीएसटी संग्रह, सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन, हवाई यात्रा में वृद्धि और वाहन पंजीकरण में सुधार प्रमुख है। दूसरी तरफ चीन में विनिर्माण क्षेत्र में धीमा विस्तार हो रहा है और घरेलू खपत और रियल एस्टेट क्षेत्र को सुधारने में कठिनाई आ रही है। वहीं गत दिनों वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा कि वित्त वर्ष, २०26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रह सकती है। अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी क्रिसिल के वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी वृद्धि पूर्वानुमान के लिए एक प्रमुख जोखिम है, क्योंकि अनिश्चितता और टैरिफ में लगातार बदलाव निवेश में बाधा डाल सकते हैं। हालांकि बढ़ते अमेरिकी टैरिफ विकास के लिए अभी भी जोखिम बने हुए हैं। इसके अलावा आरबीआई की मौद्रिक नीति में नरमी से बाहरी चुनौतियों की कुछ भरपाई हो सकेगी। केंद्र सरकार की ओर से ब्याज दरों में कटौती, आयकर में राहत और महंगाई में कमी से इस वित्त वर्ष में खपत को बढ़ावा मिलेगा। वहीं अच्छे मानसून से कृषि आय भी बढ़ सकती है। एक तरफ वैश्विक अर्थव्यवस्था में धीमेपन की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट हुई है। इससे घरेलू विकास को बढ़ावा मिलेगा। अमेरिका की अर्थव्यवस्था में मिश्रित संकेत मिल रहे हैं। यूरोप में विनिर्माण क्षेत्र धीमा है, लेकिन सेवा क्षेत्र बेहतर कर रहा है। वित्त वर्ष,२०25 की दूसरी छमाही में कैपिटल, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स के आउटपुट में इजाफा हुआ है। इसकी वजह कंस्ट्रक्शन व कैपिटल खर्च गतिविधियों में बढ़ोतरी होना है। वहीं आरबीआई के नवीनतम उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण में मार्च में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सुधार का संकेत मिलता है। ये सभी कारक घरेलू मांग में सुधार को दर्शाते हैं। चौथी तिमाही में रबी का अच्छा उत्पादन और मुद्रास्फीति में कमी भी उपभोग मांग के लिए अच्छा संकेत दिखा रहे हैं।

