मुंबई,
भारत का ई-कॉमर्स बाजार वर्ष 2030 तक लगभग दोगुना होकर 280 से 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वर्तमान में इसका आकार 120 से 140 अरब डॉलर के बीच आंका गया है। एक नई report में कहा गया है कि तेज वृद्धि के बावजूद यह कुल उपभोक्ता खर्च का केवल 7 से 8 प्रतिशत हिस्सा ही है। यह report बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप द्वारा जारी की गई है। इसमें बताया गया है कि ई-कॉमर्स के तेज विस्तार के बीच ऑफलाइन खुदरा कारोबार भी मजबूत बना हुआ है। पिछले चार वर्षों में ऑफलाइन खुदरा क्षेत्र ने औसतन 13 से 14 प्रतिशत की वार्षिक दर से वृद्धि दर्ज की है।
report के अनुसार अब बाजार ऐसे चरण में प्रवेश कर रहा है जहां ऑनलाइन और ऑफलाइन खुदरा साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। बहु-चैनल खरीदारी उपभोक्ताओं के लिए सामान्य बात बनती जा रही है। हर 10 में से 5 ऑफलाइन खरीदार खरीदारी से पहले ऑनलाइन माध्यम का उपयोग जानकारी जुटाने के लिए कर रहे हैं। वर्तमान में भारत में लगभग 30 करोड़ ऑनलाइन खरीदार हैं, जिनकी संख्या वर्ष 2030 तक बढ़कर 44 करोड़ होने का अनुमान है। इनमें से करीब 30 प्रतिशत खरीदार ग्रामीण भारत से आते हैं, जो डिजिटल पहुंच के विस्तार को दर्शाता है।
ई-कॉमर्स क्षेत्र में ई-रिटेल और ई-सर्विसेज दोनों शामिल हैं। ई-रिटेल का आकार 75 से 85 अरब डॉलर और ई-सर्विसेज का 45 से 55 अरब डॉलर के बीच आंका गया है। report में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में वृद्धि का प्रमुख आधार ई-सर्विसेज रहेंगी, जिनकी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 20 से 22 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि ई-रिटेल की वृद्धि दर 16 से 18 प्रतिशत रह सकती है। 12,000 से अधिक उपभोक्ताओं पर किए गए सर्वेक्षण के आधार पर report में कहा गया है कि आज के उपभोक्ता सुविधा, भरोसे और जरूरत के आधार पर ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों के बीच सहजता से बदलाव करते हैं। कई उपभोक्ता पहले ऑनलाइन जानकारी लेते हैं और फिर ऑफलाइन खरीदारी करते हैं, जबकि कुछ इसका उल्टा तरीका अपनाते हैं।
महिला खरीदारों में ऑनलाइन खरीदारी को लेकर सकारात्मक रुझान देखा गया है। लगभग दो-तिहाई महिलाओं का कहना है कि वे ऑनलाइन खरीदारी में अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं। वे निजता, आसान पहुंच और स्वतंत्र रूप से किसी भी समय खरीदारी की सुविधा को इसके प्रमुख कारण बताती हैं। बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की पार्टनर एवं निदेशक कनिका सांघी ने कहा कि भारत के खरीदार अब अधिक विविध हो रहे हैं और अपनी जरूरत के अनुसार अलग-अलग माध्यम अपनाते हैं। जैसे-जैसे ऑनलाइन खरीदारों का आधार व्यापक और लोकतांत्रिक बन रहा है, वैसे-वैसे कंपनियों और ब्रांडों को सरल, सुरक्षित और सहज अनुभव उपलब्ध कराने पर ध्यान देना होगा।
report में यह भी बताया गया है कि क्विक कॉमर्स क्षेत्र ने 100 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है। इससे त्वरित और छोटी-मोटी खरीदारी सामान्य प्रवृत्ति बन गई है और खरीदारी की आवृत्ति बढ़ी है। वहीं सोशल और चैट कॉमर्स ने 40 से 45 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि ऑनलाइन ब्रांडों को वार्षिक 100 करोड़ रुपये के राजस्व तक पहुंचने में लगने वाला समय घटकर लगभग 11 वर्षों से कम होकर करीब 7 वर्ष रह गया है। यह संकेत देता है कि डिजिटल माध्यम नए व्यवसायों को तेजी से विस्तार का अवसर दे रहा है।

