पिछले दो माह से अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ से कई देशों के बीच टैरिफ युद्ध शुरू हो गया था। चीन ने भी इसके जवाब में टैरिफ में बढ़ोतरी कर अमेरिका का सावचेत कर दिया था। पर अब टैरिफ वॉर थम जाने से विश्व के देशों के मध्य शांति स्थापित हो रही है। इसके मध्यनजर विदेशी पूंजी प्रवाह में तेजी देखने को मिली है। इसी कारण डॉलर के मुकाबले रुपए में भी मजबूती आई है। जहां फरवरी में रुपया टूटकर ८७ के पार पहुंच गया था। अब इसमें तेजी से सुधार हो रहा है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों की जानकारी के अनुसार भारत के विनिर्माण व औद्योगिक उत्पादन दोनों में तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो घरेलू मांग की स्थिति को दर्शाता है। इसके अलावा विदेशी पूंजी प्रवाह में उछाल से भारत के घरेलू बाजारों में मजबूती को और बढ़ावा मिला है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार में किसी भी तरह की मजबूती से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए को मजबूती मिलती है, जो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है। विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद को दर्शाती है और आरबीआई को रुपए में उतार-चढ़ाव आने पर उसे स्थिर करने के लिए अधिक गुंजाइश देती है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार आरबीआई को रुपए को गिरने से रोकने के लिए अधिक डॉलर जारी कर हाजिर और अग्रिम मुद्रा बाजारों में हस्तक्षेप करने में सक्षम बनाता है। इसके विपरीत, घटते विदेशी मुद्रा भंडार से आरबीआई के पास रुपए को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए कम जगह बचती है। इसके मध्यनजर भारत का बाहरी क्षेत्र मजबूत हुआ है और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के साथ ही विश्व व्यापार की धीमी गति के बावजूद वित्त वर्ष 2024-25 में कुल निर्यात बढक़र 824.9 बिलियन डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

