Wednesday, May 20, 2026 |
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भारतीय शेयर बाजार में मजबूती, संतुलित बना हुआ है समग्र रुझान

by Business Remedies
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Nifty and Sensex indices show a rise in the Indian stock market

मुंबई,

भारतीय शेयर बाजार ने पिछले सप्ताह लगातार छह सप्ताह की गिरावट के बाद मजबूत वापसी दर्ज की। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक संकेतों में सुधार और अनुकूल परिस्थितियों के कारण बाजार में यह तेजी देखने को मिली। सप्ताह के दौरान निवेशकों का रुझान सकारात्मक बना रहा, जिसका प्रमुख कारण अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम को लेकर बनी उम्मीदें रहीं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण तेजी की रफ्तार सीमित रही। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू आर्थिक स्थिति के स्थिर बने रहने से भी बाजार को सहारा मिला। व्यापक बाजार ने प्रमुख सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। सप्ताह के मध्य में तेज बढ़त और उसके बाद मुनाफावसूली के चलते उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन कुल मिलाकर बाजार ऊपर की दिशा में बना रहा।

nifty और sensex में उल्लेखनीय बढ़त

सप्ताह के अंत में nifty और sensex दोनों में लगभग 6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। nifty 24,050.60 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि sensex 77,550.25 के स्तर तक पहुंच गया, जो सप्ताह के उच्च स्तरों के करीब रहा। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते रहे। अमेरिका-ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम से जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी, लेकिन इसकी स्थिरता को लेकर संदेह बना हुआ है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से राहत

इस दौरान कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, जिससे घरेलू स्तर पर चिंता कम हुई और बाजार में तेजी को समर्थन मिला। ऊर्जा लागत में कमी से निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा और तटस्थ रुख बनाए रखा। केंद्रीय बैंक ने महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, वर्ष 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया गया, जबकि वर्ष 2027 के लिए इसे 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। महंगाई दर का अनुमान वर्ष 2027 के लिए 4.6 प्रतिशत किया गया है, जिसमें ऊर्जा कीमतों और मौसम संबंधी जोखिमों को ध्यान में रखा गया है।

आर्थिक आंकड़ों में नरमी के संकेत

आर्थिक संकेतकों में हल्की नरमी देखने को मिली है। सेवा क्षेत्र का सूचकांक घटकर 57.5 पर आ गया, जबकि समग्र सूचकांक 57.0 दर्ज किया गया। इसके बावजूद, वैश्विक संस्थानों ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर सकारात्मक रुख बनाए रखा है। विश्व बैंक ने भारत की विकास संभावनाओं को मजबूत घरेलू मांग और संरचनात्मक सुधारों के आधार पर बेहतर बताया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में समग्र रुझान संतुलित लेकिन सतर्क बना हुआ है। वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय कर रही हैं। निचले स्तर पर गिरावट सीमित दिख रही है, लेकिन ऊपरी स्तर पर तेजी अभी भी सीमित है। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में सुधार तो हो रहा है, लेकिन यह अभी पूरी तरह मजबूत नहीं माना जा सकता।



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