Sunday, July 26, 2026 |
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FY26 में भारतीय निर्माण उपकरण उद्योग के निर्यात में 31.5 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी

by Business Remedies
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Indian Construction Equipment Industry Exports Surge In FY26 Amid Strong Global Demand

भारत के निर्माण उपकरण उद्योग के निर्यात में FY26 के दौरान 31.5 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। घरेलू बाजार में बिक्री में हल्की गिरावट के बावजूद निर्यात में मजबूती ने उद्योग को स्थिर बनाए रखा। इंडियन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की धीमी प्रगति और कई परियोजनाओं में देरी के बीच विदेशी बाजारों में भारतीय निर्माण उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ी। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्माण उपकरण बाजार बना हुआ है। FY25 में इस उद्योग का आकार लगभग 10 अरब डॉलर आंका गया था और 2030 तक इसके 14.76 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान उद्योग की वार्षिक संयुक्त वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है।

FY26 के दौरान कुल उपकरण बिक्री में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और कुल बिक्री 1,36,995 यूनिट रही। घरेलू मांग में गैर-ओईएम निर्यात को छोड़कर लगभग 7 प्रतिशत की कमी देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर उपकरण श्रेणियों में मांग कमजोर रही। आईसीईएमए के अध्यक्ष और जेसीबी इंडिया लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक दीपक शेट्टी ने कहा कि FY26 में दर्ज मामूली गिरावट को उद्योग की कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पूंजीगत खर्च के लिए बड़े स्तर पर बजट आवंटन जारी रहने के बावजूद परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी, भूमि अधिग्रहण की चुनौतियां और धन वितरण की धीमी प्रक्रिया ने उपकरणों की मांग को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि निर्यात में मजबूत वृद्धि भारतीय निर्माण उपकरणों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है। भारतीय कंपनियों द्वारा निर्मित उपकरण अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से स्वीकार किए जा रहे हैं, जिससे उद्योग के दीर्घकालिक विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में कहा गया कि जल जीवन मिशन जैसी सरकारी योजनाओं में धन वितरण की रफ्तार धीमी रहने, नई परियोजनाओं की संख्या कम होने और भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण घरेलू मांग प्रभावित हुई। इसके अलावा ठेकेदारों को भुगतान में देरी से पूरे बुनियादी ढांचा क्षेत्र में नकदी संकट की स्थिति बनी रही। उद्योग पर लागत का दबाव भी बढ़ा। सीईवी स्टेज-V उत्सर्जन मानकों के लागू होने से उपकरणों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। चूंकि इस उद्योग में वित्तपोषण पर निर्भरता अधिक है, इसलिए लागत बढ़ने का सीधा असर मांग पर पड़ा। इसके साथ ही कच्चे तेल और बिटुमेन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण वैश्विक जिंस महंगाई ने भी उद्योग पर अतिरिक्त दबाव डाला।

आईसीईएमए के उपाध्यक्ष और केस कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शलभ चतुर्वेदी ने कहा कि भारत की बुनियादी ढांचा विकास कहानी अब भी मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन, जमीन पर तेज कार्यान्वयन और ठेकेदारों के लिए बेहतर नकदी सहायता उद्योग की विकास गति को फिर से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। रिपोर्ट में कहा गया कि सड़क, रेलवे, खनन, शहरी बुनियादी ढांचा, आवास और ग्रामीण विकास क्षेत्रों में लगातार निवेश के कारण भारतीय निर्माण उपकरण उद्योग आने वाले वर्षों में मजबूत वृद्धि की उम्मीद बनाए हुए है। मजबूत निर्यात आधार, घरेलू विनिर्माण ढांचा और बुनियादी ढांचा विकास पर सरकार का निरंतर फोकस उद्योग को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।



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