भारत और अमेरिका के बीच गत दिनों नई दिल्ली में प्रथम चरण के अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर कई महत्वपूर्ण सहमतियां बनी हैं। यह एग्रीमेंट भारत व अमेरिका के लिए आने वाले समय में व्यापार के लिए सार्थक सिद्ध हो सकेंगे। अमेरिका ने भारतीय आयात पर पारस्परिक शुल्क को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया है, जो पहले लगभग 50 फीसदी था। जहां भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करेगा। उच्च-स्तरीय वार्ताओं में दोनों पक्षों ने इस आपसी लाभकारी समझौते को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई है। जहां अमेरिकी प्रशासन भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क को कम करने पर सहमत हुआ है। भारत की ओर से अमेरिकी सूखे मेवे, ताजे फल, सोयाबीन तेल और शराब जैसे कृषि व खाद्य उत्पादों पर टैरिफ को कम या समाप्त किया जाएगा। समझौतें में दोनों देशों के बीच माल की आवाजाही को आसान बनाने, गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने और कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया गया है। शुल्क कम होने से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान अधिक प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे, जिससे निर्यात में भारी उछाल आने की उम्मीद है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार तक सुगम पहुंच मिलने से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता आएगी। व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में रियायतों के माध्यम से भारत जटिल भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच अपने आर्थिक हितों की बेहतर रक्षा कर पा रहा है। यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक सप्लाई चेन का एक प्रमुख केंद्र बनाने और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

