भारत और अमेरिका के बीच पहला Bilateral Trade Agreement बहुत जल्द साइन होने जा रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि दोनों देशों के बीच लगभग 99प्रतिशत बातचीत पूरी हो चुकी है और अब केवल कुछ अहम मुद्दों पर अंतिम सहमति बननी बाकी है।
नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान पीयूष गोयल ने बताया कि समझौते के पहले चरण पर सहमति बनने के बाद दूसरे चरण की बातचीत भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि 2 June से 4 June तक दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठकें होंगी, जिसके बाद समझौते के पहले चरण की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए यह समझौता बेहद अहम माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि अधिकांश तकनीकी और नीतिगत चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं तथा अब कानूनी दस्तावेज और कुछ शेष बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, अमेरिका की ओर से मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि भारत की टीम का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे। यह बातचीत व्यापक Bilateral Trade Agreement के पहले चरण को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है। इस समझौते में बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रिया को आसान बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और आर्थिक सुरक्षा सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में तेजी आएगी।
इस बीच अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पारस्परिक टैरिफ व्यवस्था के खिलाफ फैसला दिया था। यह व्यवस्था वर्ष 1977 के International Emergency Economic Powers Act के तहत लागू की गई थी। कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 February से 150 दिनों के लिए सभी देशों से आने वाले आयात पर समान 10प्रतिशत टैरिफ लागू किया था। इसी बदलाव के कारण दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों की पहले प्रस्तावित बैठक को कुछ समय के लिए टाल दिया गया था।
इसके बाद अप्रैल में अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में बातचीत दोबारा शुरू हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 20 April से 23 April के बीच अमेरिका का दौरा कर व्यापार समझौते पर आगे की रणनीति तय की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात क्षेत्र, विनिर्माण उद्योग और विदेशी निवेश को बड़ा लाभ पहुंचा सकता है। साथ ही अमेरिका के साथ आर्थिक संबंध मजबूत होने से वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

