Sunday, June 28, 2026 |
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खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों की सप्लाई पर सहमति

क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुआ समझौता

by Business Remedies
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भारत और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए रणनीतिक समझौते पर किए हस्ताक्षर

नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क |  भारत और अमेरिका ने मंगलवार को एक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मकसद महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। ये वही जरूरी पदार्थ हैं जो सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक गाडिय़ां, सोलर पैनल और हाईटेक रक्षा उपकरण बनाने में इस्तेमाल होते हैं। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया में चीन के इन अहम संसाधनों पर दबदबे को लेकर चिंता बढ़ रही है। माना जाता है कि इससे चीन को वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करने की ताकत मिल जाती है। यह समझौता Quad विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री S. Jaishankar और अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio के बीच हुआ।

समय की जरूरत को देखते हुए है अहम

इस दौरान विदेश मंत्री S. Jaishankar ने कहा कि आज हम भारत-अमेरिका के बीच एक ऐसा फ्रेमवर्क साइन कर रहे हैं, जिसका मकसद Critical Minerals और Rare Earths की सप्लाई को सुरक्षित करना है। हमने इस पर Quad बैठक में भी चर्चा की है। चाहे हम इसे दो देशों के बीच करें, Quad के जरिए करें या समान सोच वाले देशों के बड़े समूह के तौर पर, समय की जरूरत को देखते हुए यह जरूरी और अहम है। उन्होंने बताया कि इस फ्रेमवर्क का मकसद पूरे सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाना है, जिसमें Mining, Processing, Recycling और इससे जुड़े Investment शामिल हैं।

भारत-अमेरिका का साझा रणनीतिक हित

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि यह समझौता इसलिए किया गया है, क्योंकि भारत और अमेरिका का साझा रणनीतिक हित है। उनका कहना है कि मजबूत और Innovation पर आधारित अर्थव्यवस्थाएं ऐसी चीजों पर निर्भर नहीं रह सकतीं, जो सिर्फ एक ही देश या एक ही स्रोत से मिलती हों। वरना वह देश इसे दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में भारत यात्रा के दौरान उन्होंने कई बार भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर बात की है। यह समझौता उसी साझेदारी का एक ठोस उदाहरण है।

PAX Silica Declaration पर हस्ताक्षर करने का भी जिक्र

Rubio ने यह भी बताया कि इस समझौते की नींव 4 फरवरी को रखी गई थी, जब भारत ने Washington DC में आयोजित Critical Minerals Forum में हिस्सा लिया था। उन्होंने भारत द्वारा PAX Silica Declaration पर हस्ताक्षर करने का भी जिक्र किया। यह अमेरिका के नेतृत्व में बना एक समूह है, जिसका उद्देश्य Artificial Intelligence (AI), Semiconductor और Critical Minerals के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार करना है।

समझौते में क्या है प्रमुख

  • ये एक Full-Chain Framework है, सिर्फ खरीद-बिक्री नहीं।
  • Mining + Processing: भारत और अमेरिका मिलकर Critical Minerals की Mining और Processing में सहयोग करेंगे। अभी China 70 फीसदी+ दुर्लभ मृदा को Process करता है, इस पर निर्भरता घटाना मकसद।
  • Supply Chain Resilience: Semiconductor, EV, Solar Panel, Defense Technology, Clean Energy के लिए जरूरी Lithium, Cobalt, Graphite, दुर्लभ मृदा तत्वों की भरोसेमंद सप्लाई बनाना।
  • Recycling + Investment: Scrap और E-Waste से Critical Minerals निकालना और Project Financing में सहयोग।
  • China की Monopoly तोड़ना: Rubio ने साफ कहा कि हमारे Innovation Economy को Single-Source Monopoly के भरोसे नहीं छोड़ सकते, जो Conflict में या दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल हो।
  • Background: अमेरिका 2027 से Defense Procurement में China-Origin दुर्लभ मृदा बैन करने जा रहा है। भारत भी IREL के जरिए Myanmar के Kachin State में दुर्लभ मृदा की तलाश कर रहा है।


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