Wednesday, July 1, 2026 |
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वित्त वर्ष के आखिरी दिन शेयर बाजार टूटा सेंसेक्स 1635 और निफ्टी 488 अंक गिरा

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/ मुंबई |  चालू वित्त वर्ष 2025-26 के आखिरी कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,947.55 और निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,331.40 पर था। बाजार में चौतरफा गिरावट देखी गई। करीब सभी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बाजार में गिरावट की वजह मध्य पूर्व में तनाव का बढऩा है, जिसके समाप्त होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। इससे बाजार में निवेशकों की धारणा कमजोरी हुई है।
निफ्टी पीएसयू बैंक (4.56 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस (3.49 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (3.37 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (2.84 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (2.80 प्रतिशत), निफ्टी सर्विसेज (2.72 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ( 2.58 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया (2.50 प्रतिशत) और निफ्टी ऑटो (2.39 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,447.80 अंक या 2.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 52,650 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 416.20 अंक या 2.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 15,203.80 पर था।

तीन में केवल दो शेयर हरे निशान में बंद
बजाज फाइनेंस, एसबीआई, इंडिगो, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा और एशियन पेंट्स लूजर्स थे। केवल टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड ही हरे निशान में बंद हुए।

क्रूड ऑयल 2 फीसदी बढक़र 116 डॉलर प्रति बैरल पर आया
सोमवार को कू्रड ऑयल के दाम में 2 फीसदी की तेजी है, ये बढक़र 116 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। 28 फरवरी को ईरान जंग शुरू होने से पहले कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास थे।

रुपया डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को यानी 30 मार्च को पहली बार 95 के पार पहुंच गया है। रुपया सोमवार को 88 पैसे कमजोर होकर 95.58 पर आ गया है। अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से रुपए में ये गिरावट आई है।

वित्त वर्ष में रुपया 10 फीसदी से ज्यादा टूटा
एक महीने में रुपया करीब 4 फीसदी गिरा है। वहीं इस वित्त वर्ष में रुपया 10 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। रुपए की कमजोरी का असर आम आदमी पर भी होगा। इससे विदेशों से इम्पोर्ट होने वाले सामान जैसे मोबाइल, सोना-चांदी, क्रूड ऑयल तेल खरीदना महंगा हो जाएगा।



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