नई दिल्ली,
भारत का सेवा क्षेत्र मार्च महीने में भी विस्तार की स्थिति में बना रहा, हालांकि वृद्धि की गति में कुछ नरमी देखी गई। अंतरराष्ट्रीय मांग में मजबूती और व्यापारिक विश्वास में बढ़ोतरी ने इस क्षेत्र को सहारा दिया, लेकिन घरेलू नए कारोबार की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई रिपोर्ट, जिसे एसएंडपी ग्लोबल ने तैयार किया है, के अनुसार सेवा क्षेत्र का प्रमुख सूचकांक अपने दीर्घकालिक औसत 54.4 से ऊपर बना रहा। मौसमी रूप से समायोजित बिजनेस गतिविधि सूचकांक फरवरी के 58.1 से घटकर मार्च में 57.5 पर आ गया, जो यह दर्शाता है कि वृद्धि जारी है लेकिन गति कुछ कम हुई है।
रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनियों ने रोजगार सृजन में तेजी दिखाई, जो वर्ष 2025 के मध्य के बाद सबसे तेज स्तर पर रही। साथ ही, उत्पादन को लेकर दृष्टिकोण भी लगभग 12 वर्षों में सबसे मजबूत देखा गया है, जिससे भविष्य में सुधार की उम्मीद बनी हुई है। हालांकि, नए कारोबार में वृद्धि जारी रहने के बावजूद कुछ कारकों ने उत्पादन को प्रभावित किया। विशेष रूप से मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण मांग, बाजार परिस्थितियों और पर्यटन क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ा, जिससे कुल गतिविधियों पर दबाव बना।
वित्त और बीमा, रियल एस्टेट और व्यावसायिक सेवाएं, तथा परिवहन, सूचना और संचार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बिक्री वृद्धि की गति धीमी रही। इसके बावजूद, सभी प्रमुख श्रेणियों में निर्यात ऑर्डर में तेजी दर्ज की गई, जिससे विदेशी बिक्री में कुल मिलाकर मजबूत वृद्धि बनी रही। रिपोर्ट के अनुसार मार्च में सेवा क्षेत्र का उत्पादन पिछले 14 महीनों में सबसे धीमी गति से बढ़ा, जो नए कारोबार की धीमी वृद्धि के अनुरूप है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर में लगभग रिकॉर्ड स्तर की वृद्धि ने कुल विस्तार को बनाए रखा।
इस दौरान लागत में वृद्धि का दबाव भी देखा गया। इनपुट लागत में जून 2022 के बाद सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई, जिसके चलते सेवा प्रदाताओं ने अपने शुल्क बढ़ाए। परिणामस्वरूप, सेवाओं की कीमतों में सात महीनों का उच्चतम स्तर दर्ज किया गया, जो दीर्घकालिक औसत से भी अधिक रहा। stock market update: सेवा क्षेत्र के आंकड़े अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं, लेकिन लागत दबाव और वैश्विक परिस्थितियां आगे की वृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं।

