Thursday, March 12, 2026 |
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वैश्विक तनाव के बीच भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार

सरकार ने दी जानकारी

by Business Remedies
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India's strategic oil reserves and government preparedness on energy security

नई दिल्ली,

ईरान में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर कई देशों में चिंता बढ़ी है, लेकिन भारत में तेल संकट की स्थिति नहीं बनने वाली है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार, विविध आयात स्रोत और मजबूत आर्थिक आधार मौजूद हैं, जिसके कारण देश वैश्विक ऊर्जा झटकों का सामना करने में सक्षम है। अधिकारी के अनुसार भारत ने अपने ऊर्जा आयात को लगभग 40 देशों तक विविध किया है। इससे किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भरता काफी कम हुई है। देश के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का ऐसा रणनीतिक भंडार मौजूद है जो बाजार की मांग को 70 दिनों से अधिक समय तक पूरा कर सकता है। इसके साथ ही भारत के पास लगभग 74 दिनों का अतिरिक्त भंडार सुरक्षा कवच के रूप में उपलब्ध है। यह व्यवस्था वर्ष 2026 में उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा झटकों से निपटने के मामले में भारत को क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में कहीं आगे रखती है।

विदेशी मुद्रा भंडार से आयात सुरक्षित

भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार भी है। यह भंडार देश के आयात को लगभग 11 से 12 महीनों तक कवर करने में सक्षम है। इतना ही नहीं, यह भंडार देश के तेल आयात बिल को लगभग 5 वर्षों तक संभालने के लिए भी पर्याप्त माना जा रहा है। इस मजबूत आर्थिक आधार के कारण वैश्विक संकट का असर भारत पर सीमित रहने की संभावना है। सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है। इसमें रियायती दर पर  रूस से कच्चे तेल की खरीद, आवश्यक वस्तु अधिनियम का उपयोग और विभिन्न देशों से आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल है। अधिकारी ने कहा कि यह नीति व्यावहारिक आर्थिक कूटनीति का उदाहरण है, जिसमें देश की संप्रभुता से समझौता किए बिना ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

महंगाई पर सीमित असर

ऊर्जा संकट का असर महंगाई से ज्यादा आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है, लेकिन भारत में महंगाई दर अभी भी नियंत्रित है। देश की महंगाई दर लगभग 2.75 प्रतिशत है, जो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम में से एक है। रूस से रियायती कच्चे तेल की खरीद, ईंधन कर में लचीलापन और रसोई गैस की नियंत्रित कीमतों के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को उपभोक्ताओं के लिए नियंत्रण में रखा गया है। उदाहरण के तौर पर जापान की महंगाई दर लगभग 5 प्रतिशत है और वह कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए 75 से 90 प्रतिशत तक होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर है। इसके विपरीत भारत ने अपने ऊर्जा आयात को कई देशों में फैलाकर इस मार्ग पर निर्भरता को काफी कम कर दिया है। पहले यह निर्भरता लगभग 50 प्रतिशत थी, जिसे घटाकर करीब 20 प्रतिशत कर दिया गया है।

रूस से रियायती तेल की खरीद जारी

पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद भारत रूस से रियायती कच्चे तेल की खरीद जारी रखे हुए है। वर्तमान में देश के कुल तेल आयात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रूस से आता है। इसके अलावा इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका से भी तेल आयात किया जा रहा है। अधिकारी के अनुसार यह नीति किसी राजनीतिक झुकाव के बजाय ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण पर आधारित है। भारत के पास जहां दो महीने से अधिक का तेल भंडार मौजूद है, वहीं पड़ोसी देशों की स्थिति कमजोर है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के पास केवल लगभग 30 दिनों या उससे कम का भंडार है। इस कारण पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर लगभग 55 रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई है। श्रीलंका में भी घबराहट में खरीदारी के कारण ईंधन कीमतें बढ़ाई गई हैं, जबकि बांग्लादेश को ऊर्जा की खपत सीमित करने के लिए राशनिंग लागू करनी पड़ी है।



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