Monday, July 27, 2026 |
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आर्थिक सुधारों से नई कंपनियों में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी

उद्यमिता को मिला नया बल

by Business Remedies
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Graph showing growth in registration of new companies in India

नई दिल्ली,

देश में आर्थिक सुधारों और कारोबारी माहौल में सुधार के चलते नई कंपनियों के पंजीकरण में 27 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आधिकारिक तथ्य पत्र के अनुसार वर्ष 2020–21 में जहां 1.55 लाख नई कंपनियां पंजीकृत हुई थीं, वहीं वर्ष 2025–26 के पहले 10 महीनों (3 February 2026 तक) में यह संख्या बढ़कर 1.98 लाख हो गई है। यह वृद्धि देश में कारोबार सुगमता को बढ़ाने के लिए किए गए सुधारों का परिणाम मानी जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026–27 में भी कारोबार सुगमता को मजबूत करने के लिए कई कदम प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें डिजिटल व्यापार सुविधा, कर व्यवस्था में स्थिरता, अनुपालन बोझ में कमी, मुकदमेबाजी में कमी, भरोसे पर आधारित सीमा शुल्क प्रणाली तथा निवेश अनुकूल कर ढांचा शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसा पारदर्शी और सरल वातावरण तैयार करना है, जिससे उद्योग जगत को दीर्घकालिक स्थिरता मिल सके।

संस्थागत सुधारों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

स्टार्टअप इंडिया, ऋण गारंटी योजना और डिजिटल ऋण आकलन मॉडल जैसे संस्थागत सुधारों ने तकनीक आधारित, पारदर्शी और निवेशक अनुकूल व्यवस्था को मजबूत किया है। इसके साथ ही जन विश्वास अधिनियम, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता तथा न्यूनतम वैकल्पिक कर जैसे नियामकीय सुधारों ने जवाबदेही और विश्वास पर आधारित प्रशासनिक ढांचे को प्राथमिकता दी है। इन कदमों से कारोबार के लिए अनिश्चितता कम हुई है और उद्यमियों को स्पष्ट दिशा मिली है। February 2026 तक उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 2.16 लाख से अधिक हो चुकी है। वर्ष 2016 से शुरू किए गए सुधारों का उद्देश्य पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को सरल बनाना और अनुपालन बोझ को कम करना रहा है। तकनीकी नवाचार, ग्रामीण उद्यमिता, शैक्षणिक अनुसंधान और क्षेत्रीय भागीदारी को बढ़ावा देने वाली विभिन्न पहलों ने इस पारिस्थितिकी तंत्र को व्यापक और संतुलित बनाया है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि स्टार्टअप को समर्थन केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप पूरे देश में फैले।

उद्योग जगत में सकारात्मक विश्वास

भारतीय रिजर्व बैंक के व्यापार अपेक्षा सूचकांक ने वर्ष 2024–25 और वर्ष 2025–26 की दूसरी तिमाही (July से September) तक 100 के तटस्थ स्तर से ऊपर बने रहकर भविष्य के उत्पादन, रोजगार और निवेश को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। यह दर्शाता है कि उद्योग जगत में मांग और विकास संभावनाओं को लेकर विश्वास कायम है। पिछले कुछ वर्षों में भारत निवेश और कारोबार दोनों के लिए आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरा है। सरकार की सुधार आधारित विकास रणनीति उद्यमिता को सशक्त बनाने, वित्त तक पहुंच बढ़ाने, नियामकीय ढांचे को आधुनिक बनाने और व्यापार सुविधा को मजबूत करने पर आधारित है। इन उपायों से न केवल कारोबार सुगमता में सुधार हुआ है, बल्कि वित्तीय समावेशन को गहराई मिली है, नवाचार को प्रोत्साहन मिला है और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की वृद्धि को गति मिली है। इससे भारत वैश्विक व्यापार और निवेश के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।



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