बिजनेस रेमेडीज / मुंबई (आईएएनएस)। भारत का मैन्युफैक्चरिंग परचेसिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) दिसम्बर में घटकर 55 पर आ गया, जो नवंबर में 56.6 था। यह जानकारी शुक्रवार को जारी S&P Global द्वारा संकलित रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, HSBC India Manufacturing PMI अब भी अपने दीर्घकालिक औसत से ऊपर बना हुआ है, जिससे संकेत मिलता है कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र ने वर्ष 2025 का समापन मजबूत स्थिति में किया है। पीएमआई का 50 से ऊपर रहना आर्थिक गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है, जबकि इससे नीचे जाना संकुचन का संकेत माना जाता है। रिपोर्ट में बताया गया कि निरंतर बनी मांग के चलते नए व्यवसाय और उत्पादन में वृद्धि जारी रही। हालांकि, प्रतिस्पर्धा के दबाव और कुछ विशिष्ट उत्पाद श्रेणियों में बिक्री में नरमी के कारण विस्तार की गति अपेक्षाकृत धीमी रही।
S&P Global Market Intelligence की इकोनॉमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पॉलियाना डी लीमा ने कहा,
“हालांकि विकास की गति कुछ धीमी हुई है, लेकिन भारत के विनिर्माण उद्योग ने 2025 का समापन मजबूत आधार पर किया है। नए व्यवसायों में तीव्र वृद्धि से कंपनियों के वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में सक्रिय बने रहने की उम्मीद है और सीमित मुद्रास्फीतिक दबाव मांग को समर्थन देता रहेगा।”
रिपोर्ट के अनुसार, खरीद स्तर में वृद्धि पिछले दो वर्षों में सबसे कम रही। पिछले दो महीनों की तरह, इनपुट लागत में ऐतिहासिक रूप से बेहद सीमित बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि शुल्क मुद्रास्फीति की दर नौ महीनों के निचले स्तर पर आ गई। रोजगार सृजन में भी तेजी देखी गई, हालांकि यह दिसम्बर 2023 के बाद से सबसे कम स्तर पर रही। वहीं, उत्पादन वृद्धि अक्टूबर 2022 के बाद से सबसे धीमी गति से दर्ज की गई।
पॉलियाना डी लीमा ने आगे कहा कि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को वैश्विक स्तर पर अन्य देशों की तुलना में कम लागत दबाव का सामना करना पड़ा है। कई कंपनियों को उम्मीद है कि प्रतिस्पर्धी कीमतें नए साल में विभिन्न क्षेत्रों से नए ऑर्डर लाने में मदद करेंगी। रिपोर्ट में एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व से बेहतर मांग का उल्लेख किया गया है और भारतीय निर्माताओं को 2026 के दौरान उत्पादन में और वृद्धि की उम्मीद है।

