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दिसम्बर में घरेलू पैसेंजर वाहनों की थोक बिक्री में आया 26 प्रतिशत का उछाल

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज / मुंबई (आईएएनएस)।घरेलू पैसेंजर वाहन (पीवी) की थोक बिक्री दिसम्बर में सालाना आधार पर करीब 26 प्रतिशत बढ़कर लगभग 4,05,000 इकाइयों पर पहुंच गई। सितंबर में वस्तु एवं सेवा कर (GST) में युक्तिकरण के बाद बनी निरंतर मांग और वाहन कंपनियों द्वारा दिए गए वर्षांत छूट प्रस्तावों के चलते यह तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा, जनवरी से संभावित कीमतों में बढ़ोतरी से पहले उपभोक्ताओं द्वारा अग्रिम खरीद किए जाने से भी बिक्री को मजबूती मिली। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 में थोक बिक्री सालाना आधार पर 5.7 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड स्तर करीब 4.55 मिलियन इकाइयों तक पहुंच गई।

दिसम्बर में निर्माताओं से डीलरों को भेजी गई गाड़ियों की संख्या 26.2 प्रतिशत बढ़कर 4,07,497 इकाई रही, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा 3,22,965 इकाई था। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पूरे वर्ष की वृद्धि दिसम्बर की तेज़ बढ़त की तुलना में सीमित रही, क्योंकि वर्ष की पहली छमाही में मांग अपेक्षाकृत कमजोर बनी रही थी, जिसे बाद में GST दरों में कटौती से सहारा मिला। अधिकांश वाहन निर्माताओं ने मजबूत वृद्धि दर्ज की, जबकि कुछ कंपनियों ने दिसम्बर में अब तक की सबसे अधिक मासिक बिक्री हासिल की, जहां बिक्री में 37 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई।

एसयूवी की हिस्सेदारी कुल पैसेंजर वाहनों में बढ़कर 55.8 प्रतिशत हो गई, जो 2024 में 53.8 प्रतिशत थी। वहीं, GST दरों में कटौती के बाद छोटी कारों की मांग में भी सुधार के संकेत मिले हैं।रेटिंग एजेंसी ICRA ने अपनी हालिया रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026 के लिए थोक बिक्री मात्रा में 1 से 4 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया है, जिसे स्थिर मांग, GST में कटौती, नए मॉडल लॉन्च और बाजार में बनी सकारात्मक गति का समर्थन मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर के दौरान भारत में तिपहिया वाहनों की बिक्री 21.3 प्रतिशत बढ़कर 71,999 इकाई रही, जबकि दोपहिया वाहनों की बिक्री 21.2 प्रतिशत उछलकर 19,44,475 इकाई तक पहुंच गई।

इस दौरान स्कूटरों की बिक्री 29.4 प्रतिशत बढ़कर 7,35,753 इकाई रही, जो शहरी क्षेत्रों में मजबूत मांग को दर्शाती है। वहीं, मोटरसाइकिलों की बिक्री 17.5 प्रतिशत बढ़कर 11,63,751 इकाई हो गई, जिसे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों से स्थिर मांग का समर्थन मिला। रिपोर्ट में कहा गया कि सहायक नीतिगत सुधार और बेहतर बाजार धारणा इस वृद्धि को 2026 तक बनाए रखने में मदद कर सकती है।



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