अमेरिका की ओर से पिछले दिनों से चीन के उत्पादों पर 7.5 फीसदी से 100 फीसदी तक के ऊंचे शुल्क लगाने के फैसले के बाद भारत के सामने चीन से बड़े पैमाने पर उत्पादों की डंपिंग का खतरा मंडरा रहा है। चीन के सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, लिथियम-आयन बैटरी, सीरिंज और इस्पात जैसे उत्पादों पर लगाए गए इन ऊंचे शुल्कों से चीन को अमेरिकी बाजार में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। अब आशंका जताई जा रही है कि चीन अपने अतिरिक्त उत्पादों को भारत जैसे बाजारों में निर्यात कर सकता है, जिससे भारतीय उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के उत्पादों की इस डंपिंग से भारतीय उद्योगों, खासकर स्टील और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। इसके लिए भारत को अपने उद्योगों की सुरक्षा के लिए त्वरित कदम उठाने होंगे। सरकार को वाणिज्य विभाग के तहत एक वार रूम भी स्थापित करना चाहिए, जो इन उत्पादों के आयात पर नजर रख सके और समय पर हस्तक्षेप कर सके। इससे घरेलू उद्योगों को चीन की डंपिंग से बचाने में मदद मिलेगी। पिछले साल चीन से भारत में स्टील का आयात 91 फीसदी बढ़ गया था और इस साल भी इसमें तेजी आई है। चीन, अपने निर्यात बाजारों पर बंदिशों के कारण, भारत जैसे देशों में स्टील डंप कर रहा है। हालांकि, डंपिंग-रोधी शुल्क लगाने की प्रक्रिया लंबी होने के कारण भारतीय उद्योगों को तुरंत राहत मिल पाना मुश्किल है।अगस्त, 2024 के आयात-निर्यात आंकड़ों के अनुसार, चीन को भारत से होने वाला निर्यात 22.44 फीसदी घटकर 1 अरब डॉलर रह गया, जबकि चीन से आयात 15.5 फीसदी बढक़र 10.8 अरब डॉलर हो गया। यह व्यापार असंतुलन भारत के लिए चिंता का विषय है।
वहीं अमेरिकी नीति का असर भारत के सोलर पैनल और ईवी उद्योग पर भी पड़ सकता है। अमेरिका द्वारा ईवी और सोलर पैनलों पर शुल्क बढ़ाने से भारत और अन्य विकासशील देशों को कोई बड़ा फायदा नहीं होगा। हालांकि भारत में सोलर पैनल डंपिंग रोकने के लिए सरकार ने कड़े नियम लागू किए हैं, जिनके कारण चीन अपने पैनल भारत में आसानी से नहीं बेच सकता। भारत को इस खतरे से निपटने के लिए अपने डंपिंग-रोधी नियमों को और सशक्त करने की आवश्यकता होगी।

